ढूंढ चुके थे हम उनके सवालों के जवाब

imagesढूंढ चुके थे हम उनके सवालों के जवाब
मगर सवाल खुद ब खुद ही रूठ गया
उलझ चुके थे खुद ही जवाबों के सैलाब
लेकिन एक शकस अपना ऐसे ही लूट गया

परेशान धरती आज और था परेशान नीला आसमान
टूट चुका मोहब्बत में मेरी तलब इक इंसान
हाथ उठा दुआ के लिए की भूल गया ख्वाब

 ढूंढ चुके थे हम उनके सवालों के जवाब
मगर सवाल खुद ब खुद ही रूठ गया
उलझ चुके थे खुद ही जवाबों के सैलाब
लेकिन एक शकस अपना ऐसे ही लूट गया

फिर चले आये परेशान ज़िंदगी के सवाल
दुआओं दवाओं पर पहरा लगाते ख्याल
अपनों से ही दूर करवाते  हुए सैलाब

ढूंढ चुके थे हम उनके सवालों के जवाब
मगर सवाल खुद ब खुद ही रूठ गया
उलझ चुके थे खुद ही जवाबों के सैलाब
लेकिन एक शकस अपना ऐसे ही लूट गया

एक शिकन देखी आज उनके हसीं चेहरे पर
जैसे छाया बन उलझ चुके किसी के सेहरे पर
सपनो ख्वाहिशों के बीच इक  धूमिल याद

ढूंढ चुके थे हम उनके सवालों के जवाब
मगर सवाल खुद ब खुद ही रूठ गया
उलझ चुके थे खुद ही जवाबों के सैलाब
लेकिन एक शकस अपना ऐसे ही लूट गया ~ मोहन अलोक

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