मैंने खुद को अतीत में लेजा कर

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मुस्कराती है

जब भी यह हसीं कलियों की बगिया

मैंने खुद को अतीत में लेजा कर

तुम्हे महसूस किया

दर्द दे गया तुम्हारा हाथ झटक कर जाना

सपनों में आ कर

तुम्हारा बार बार रुलाना

जलाता रहा मेरे मन में

तुम्हारे याद का दिया

मुस्कराती है जब भी यह हसीं कलियों की बगिया

मैंने खुद को अतीत में लेजा कर

तुम्हे महसूस किया  ~ मोहन अलोक 

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