By Dr L D Mohan

Ram Mahima – Geeta Saar

राम महिमा गीता सार

आज के व्यस्त जीवन में सम्पूरण रामायण का पाठ करना एक आम व्यक्ति के लिए असंभव है ! अतः तुलसी दस् रचित राम चरित मानस तथा विनय पत्रिका में कुछ सतूतियन दोहे चोपाइअन का चयन कर के यह पुस्तक तैयार की गयी है ! भगवत गीता इतिहास का महान दार्शनिक और धार्मिक वार्ता है !गीता सार में डॉ मेहता वसिष्ठ देव मोहन और अन्य लेखकों के पद्य अनुवाद संगरहित है ! एक मुस्लिम भाई ख्वाजा गुल मोहम्मद द्वारा उर्दू अनुवाद के कुछ पंक्तिया भी ली गयी हैं !

Ram Mahima - Geeta Saar

As we are aware that it is very difficult for a common person to perform Sampoorn Ramayan Reading (Patth). The Author has selected few important paragraphs, Dohaas, Choppaees of Ram Charit Manas written by  Goswami Tulsi Dass & Vinay Patrika.

We understand the fact that Bhagwat Gita is an important contribution to hindu religion & culture by Lord Krishana.

There are some paras written by the Great Urdu Scholar Gul Mohammad on this subject.

 

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Andeman Nikobar Deepshmooh

अंडमान निकोबार द्वीपसमूह
अंडमान निकोबार द्वीपसमूह का प्राकृत सौन्द्रिया अनुपम व मनमोहक है ! इसे धरती का सवर्ग कहा जा सकता है ! सन १८५७ इ के राजनातिक कैदीओं को अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में बसा दिया गया था ! उन्हें असहनी यातनाएं दी गयी थी ! इस लिए इसका नाम कला पानी रखा गया !
मुझे अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में १०० दिन रहने का अवसर मिला ! मैंने वहां जो देखा सुना और पुस्तकों में पढ़ा उन सब का वर्णन मैंने एस पुस्तक में दिया है ! भारत की स्वंत्रता के लिए अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के वासिओं का बहुत बढ़ा योगदान है !
पुस्तक के प्रथम अध्याय में अंडमान निकोबार द्वीपसमूह का इतिहास और दर्शनी सथलों का वर्णन है ! द्वितीय अध्याय में यहाँ के जन जातिओं का वर्णन है ! तृतीय अध्याय में १८५७ से लेकर १९४२ तक के बंदिओं का वर्णन है ! चतुर्थ अध्याय में अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में जपानिओं का नियमंत्रण व् उनके अत्याचार की दुखद कथा तथा भारत की आज़ादी की कहानी है !

 

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Andeman Nikobar Deepshmooh

When we visit Andemaan Nikobar we discover the real beauty of nature. We get so much attracted to this place that we feel as if we are in heaven. This book describes about the beautiful, nice, attractive island of andeman Nikobaar. The book also high lights the contributions of local tribes of this region in freedom struggle of India.

The book is in two parts.First Part covers history of the region and sight seeing places while second part covers about local tribes, their Culture & traditions. Third chapter describes about the freedom fighters & Prisoners kept in the Island Jails. Fourth Chapter describes about the tyrant Japnese Rule & Tortures to local people given by Japanese & the story of freedom of this part of India.

The book makes us realize about our cultural inheritance.

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Ayodhya Chitrkoot

अयोदिया चितेर्कूट दर्शन

इस पुस्तक में अयोदिया के प्राचीन इतिहासिक मंदिरों राम जनम भूमि हनुमान गढ़ी तुलसी समारक बाल्मीकि रामायण भवन गुरुद्वारा नज़रभाग व् ब्रहाम्कुंद अयोदिया जी के टीलों अखार्रों सरयू के घाटों का उलेख किया गया है ! प्रतेयक मंदिर के साथ धरमशाला है ! यहाँ यात्री आराम कुर सकते हैं !
अयोडिया के प्रयाग राज बस द्वारा ७ घंटे और प्रयाग से चितेर्कूट लगभग ४ घंटे लगते हैं ! चितेर्कूट विन्धयाचल की सुरम्य घाटी में बसा तीर्थ स्थान है ! बाल्मीकी के परामर्श से श्री राम चंदर जी ने बनवास काल के लगभग ११ वर्ष गुजरे थे ! चितेर्कूट के शैल शिखर कन्दराएँ झरने अनुपम हैं ! मन्दाकिनी नाडी का मुंड मुंड बहना सभी को आकर्षित करता है ! कामदगिरी की ५ km की प्रक्रिमा है ! चितेर्कूट के विकास का श्रेय प्रनुख समाज सेवी श्री नाना जी देशमुख का है ! उन के द्वारा दीं दयाल शोद स्थान आरोग्य धाम राम मंदिर दर्शनीय हैं ! चितेर्कूत के आस पास सभी स्थान जैसे राम घात सटी अनसूया आश्रम गुप्त गोदावरी हनुमान धारा जानकी घाट स्फटिक शिला सूर्य कुंद बाल्मीकि आश्रम गणेश बाग़ कांच का मंदिर सभी स्थान दर्शनीय हैं

Ayodhya Chitrkoot

This book contains description of important temples & monuments of historical importance like Ram Janam Bhoomi, Hanumaan Garhi, Tulsi Samarak, Balimiki Ramayan Bhawan, Gurudwara Nazarbagh, Brahmkund etc. These temples also provide  essential  facilities to tourists & pilgrims. Chitrakoot is an important pilgrimage place of Hindus which is located in the beautiful valley of Vindhyachal.  On the advice of Rishi balmiki, Shri Ramchander had spent eleven years of his banwaas in this place. There are many sight seeing places like Ram Ghaat, Sati ansuya ashram, Gupt Godavari, Hanumaan dhaara, Jaanki Ghat, Sphtic shila, Surya Kund etc near Chitrakoot.

 

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Ayodhya Ke Pramukh Raja

अयोधिया के प्रमुख राजा

इस पुस्तक में ईश्वाकु से लेकर गुप्त काल तक के अयोधिया के प्रमुख राजाओं का उल्लेख है इश्वाकू काकुत्स युव्नाशव मनदाता हरिश्चंदर सगर दिलीप भागिरिथ रघु अज दशरथ श्री रामचंदर व उनके भाई तथा पुटर कुश और लव का वर्णन है प्रसेन जित ने बोध धरम अपना लिया था l मौर्य वंश का अंतिम राजा वृहद्रथ था l वह दुर्लब और कायर साबित हुआ l उसके सेनापति पुष्य मीटर ने राजा का अंत कर राज्य की बागडोर अपने हाथ में ली l शुंग वंश ने लगबग ११२ वर्ष राज्य किया गुप्त वंश के प्रकर्मी राजा चंदेर्गुप्त समुन्देर्गुप्त सकंद गुप्त व कुमार गुप्त के शासनकाल में समस्त भारत को एक सूत्र में बांधा नरसिंह ने हूणों के अकर्मण को रोका था. इतिहास गुप्त काल को सवर्ण युग मनाता है

Ayodhya Ke Pramukh Raja

This book describes about all the prominent Kings of Ayodia ie kaushal Pradesh from Ishwaku onwards during Guptkaal Period.  The book provides information of kings like  ishwaku,kakutsth,Yunnasv, Mandata, Harishchander, sagar, Dilip, Bhagirth, Raghu,Auj, Dashrath, Shri Ramchander, Kush etc. The Guptkaal period is also known as Golden period of Indian History. During this period kingdoms of Chandergupt Maurya, samudergupt, Chandergupt II, Sakand Kumar Gupt had united Ancient India. NurSingh Gupt had successfully discouraged invaders like Hoons and had strengthened his kingdom.

 

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Bharat Darshan

भारत दर्शन

भारत दर्शन पुस्तक के दो भाग हैं प्रथम भाग में दुर्गम घाटीओं व् बर्फीले क्षेत्रों के यात्राओं का तथा द्वितीय भाग में मैदानी क्षेत्रों का वर्णन है पर्वतीय क्षेत्रों की यात्राओं में जोगिन्दर नगर धरम शाळा त्रुन्द खजियार मणि महेश गंगोत्री गोमुख कुलु मनाली सोलंग घटी मणिकरण क्षीर गंगा यमनोत्री केदारनाथ बद्रीनाथ श्री हेमकुन्ट साहिब की यात्राओं का वर्णन है द्वितीय भाग के अनतेरगत लुधिअना से अयोदिया लखनोउ वाराणसी नालंदा राजगीर चयवन ऋषि का आश्रम धोसी भोपाल साँची उज्जैन नागपुर सेवा ग्राम पोंणार रामगिरी प्रयाग कन्या कुमारी रामेश्वरम मुंबई गोवा सिरडी जगन्नाथपुरी कोणार्क श्री नगर त्रिपुति महाबली पुरम कांची द्वारका सोमनाथ आदि यात्राओं का वर्णन है

Bharat Darshan

This book is in two parts. First part of the book deals with difficult terrains of valleys & snow covered regions of India. Second part includes other regions ie plains  like Ayodhiya, Lukhnow, Varanasi, nalanda, Rajgiri, Chayvan Rishi Ashram, Dhosi, Bhopal, saanchi. Ujjain, Nagpur, Sewagram, poonar, ranmgiri, Pryag,kanya Kumar, Rameshwaram, Mumbai, Goa, Shirdi, Jagannath puri, konark, Sri Nagar, Tripiuti, Mahabali Puram, Kanchi, Dwarka, Somnath etc

Journeys to   Mountains & Snow covered regions include Joginder nagar, Dharamshala, Trund, Khajiyar, Mani Mahesh,dalhousiGangotri, Gomukh, KuluManali,Solang Ghati, Mani Karaqn,Khashir ganga,Yamnotri, Kedarnath, Badri nath, Hemkunt etc

 

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Hamaare Poorvaj

हमारे पूर्वेज

भारत एक देव भूमि है हमारा धरम संस्कृति किस्सी एक व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं की गयी बल्कि असंख्य ऋषि मुनियों की तपस्या का फल ही उन्होंने देव वाणी संस्कृत में रचित अक्षय ज्ञान का भंडार हमें दिया ऋषि मुनि केवल ब्राहिमिनो के हे पूर्वज नहीं बल्कि चार वर्णों के गोत्रकार हैं हमारे पूर्वेज पुस्तक में एश्वकू वंश के गुरु वशिष्ठ के अतरिक्त उनके वंशज पराशर व् व्यास भृगु वंश के प्रमुख ऋषि ज्म्दागिन परशुराम बाल्मीकि मार्कंडेय पान्निनी कश्यप शांडिल्य संदीपन अंगीरा कुल के भरद्वाज द्रोणाचार्य पंतजलि धन्वन्तरी का उल्लेख है एन के अतरिक्त पुल्सत्य विश्वमित्टर याज्ञवल्क्य ऋषि तथा अगस्त गौतम व् अत्री वंश के ऋषियों का वर्णन है पुलह कर्तु चाणक्य व् चरक आदि का भी उल्लेख किया गया है ऋषियों के वर्णन से पूर्व ब्रह्मा प्रजापति नारद इन्दर आदि का परिचय भी दिया गया है आधुनिक विज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मा एक व्यक्ति ना हो कर प्रतेयकf युग का प्रमुख विद्वान् है प्रजापति नारद व् इन्दर एक व्यक्ति न हो कर उपाधियाँ है

हमारे पूर्वज (Our Ancestors)
By
Dr Lajja Devi Mohan

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India is a land of Saints. Our great religion & culture ie Hindu Dharma is not a creation of an individual but has taken birth consequent to contributions of several saints & scholars. The knowledge shared by these Rishis ie our ancestors is an ocean of values written in Dev vani ie Sanskrit. These Rishis are the  ancestors of all the Hindus ie  Brahmins,Khatriyas,Viasghyas & Shudras. This book contains information about our ancestors like Rishi Vasishtha, Prashar, Vyas, Parshuram,balmiki, Markandey, Paanini, Kashyap, Shaandilya, sandipyan, aangira Kul ke Bhardwaj, Dronacharya,Pantjali, Dhanwantri, Pulasatya,Vishwaa Mitra, Yagyavalkya, August, Gautam and Attri vansh Rishis.As per Hindu intellectuals, Braahma Rishi was not an individual but the Main Spiritual Scholar ofOur Ancestors each century.

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Jai Bharat Mata

जय भारत माता
हिन्दू धरम के सरंक्षण का इतिहास
इस  पुस्तक में चार अध्याय हैं प्रथम अद्याय में भारतीय धर्म संस्कृति की विशेषताएं विश्व के प्रमुख धरम यूनान के दार्शनिक ईसाई व् इस्लाम धरम के पूर्व विश्व की स्थिति पूर्वी द्वीप समूह आस्ट्रलिया कम्बोडिया जावा सुमात्रा श्री लंका बर्मा आदि देशों का वर्णन है द्वितीय अद्याय परशुराम हैद्य युद्ध से अरम्ब होता है ततपश्चात राम रावन युद्ध रजा पुरुष मौर्या शुंग गुप्त वंश के राजाओं तथा हर्षवर्दन का वर्णन है
तृतीय अद्याय में सिंद प्रदेश ke रजा दाहर महमूद गजनवी के भारत अकर्मण तमूर लंग पृथ्वी राज चौहान आचार्य रामानंद चतेन्य महा परभु पुर्त्गलिओन के अत्याचार मंगेश मंदिर मुग़ल बादशाहों का इतिहास वीर शिव जी सिख पन्त रजा राम मोहन राय के विषय में जानकारी है चतुर्थ अद्याय में नाम धारी पंथ उन के नियम स्वामी राम क्रिशन परम हंस स्वामी दयानंद स्वामी विवेकानंद माक्स मूलर विभिन संस्थाओं आर्य समाज देव समाज हिन्दू महा सभा RSS सुभाष चंदर बोसे सोम नाथ मंदिर का निर्माण वहप स्वंत्रता के साथ देश विभाजन हिन्दू धरम संस्कृत के सरंक्षण में भारतीय नारी का योग दान आदि का वर्णन है

Jai Bharat Mata

There are four chapters in this book.

First Chapter describes about the Virtues of Hindu religion & culture, main religions of world, Philosphers of Unaan, World Order before Islam & Christianity etc.

Second Chapter   describes about he Wars fought by Parshuram & haidya, Ram & Ravan, King Porus. Mauryas, Gupt period kings & Harashwardan etc

Third Chapter describes about King Dahar of Sindh, Invasions of Mohammad Gajnavi, Prithwi Raj Chauhaan, Veer Shiva Jee, Sikh Panth, Histry of Mughul kingdoms etc

Fourth Chapter explains about Naamdhari Sect, Swami Ran Krishan, Paramhans, Swami Dayanand, Swami Vivekanand, RSS, Subhash chander Bose, Somnath temple and the contributions made by Indian citizens to preserve Hindu culture.

 

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Ram Kavya

राम काव्य
इस पुस्तक में बाल्मीकि रामायण से लेकर १९४७ इसवी तुक राम कथा सम्बंदित विभिन भारतीय भाषाओँ में रचित साहित्य kaa संक्षेप में वर्णन है वैदिक साहित्य में राम कथा के पात्रों का उल्लेख है महाभारत पूरण तथा पुरानेत्र साहित्य में संस्कृत भाषा में राम कथा सम्बन्धी महा काव्य खंड काव्य विलोम काव्य गीति काव्य चम्पू काव्य उपलब्द हैं बोध साहित्य के अंतर्गत पली भाषा में रचित तीन जातकों में राम कथा मिलती है जैन साहित्य में संस्कृत प्राकृत अप ब्रंश व् कन्नड़ भाषा में राम कथा सम्बन्धी रचित साहित्य है हिंदी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास रचित राम चरित मानस भक्ति काव्य है अन्य रचनाएँ जैसे भरत मिलाप रामचंद्रिका हनुमान नाट्य गोसाईं गुरुवाणी आदि है श्री दशम ग्रन्थ साहिब में राम अवतार में श्री राम के जनम से लेकर स्वर्गारोहण तक की पूरी कथा है प्रमुख कवी अगरदास नाभा दास बाबा राम स्नेही विश्वनाथ सिंह आदि का भी वर्णन है

Ram Kavya

This book includes brief description of  Balmiki Ramayan to Ram katha literature and main characters of Ram Katha written in different languages of India. For example 1.  Maha Bharat, Puraan, Ram Katha, maha kavya, khund kavya, Vilom Kavya, Giti Kavya, Champu Kavya written in sanskrit 2. Ram Katha written in pali language of Bodh literature 3. Ram Katha written in sanskrit, Prakrit, upbhransh & kannad  of  jain literature 4. Ramcharit Manas written in Hindi by Goswami Tulsi dass. There are many other contributions various sects of early India. For example Bharat Milaap,  Ram Chandrika, Hanumaan natak, Gosaai Gur wani, Shri Dasham Guru Granth sahib which describes about  Ram from Birth to Swargarohan. During 18th & 19th century Ram Kavya was written in Punjabi.

During the end of 18th century, many eminent  poets & writers like Bhartendu Harish Chander, Balmukund Gupt, Radha Krishan Dass, Ram Charit Upaadhaya, Surya Kant Tripathi and Swami Satyanand jee had contributed in this subject.

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Tulsi Or Govind Ke Ram Kavya

राम काव्य
इस पुस्तक में बाल्मीकि रामायण से लेकर १९४७ इसवी तुक राम कथा सम्बंदित विभिन भारतीय भाषाओँ में रचित साहित्य kaa संक्षेप में वर्णन है वैदिक साहित्य में राम कथा के पात्रों का उल्लेख है महाभारत पूरण तथा पुरानेत्र साहित्य में संस्कृत भाषा में राम कथा सम्बन्धी महा काव्य खंड काव्य विलोम काव्य गीति काव्य चम्पू काव्य उपलब्द हैं बोध साहित्य के अंतर्गत पली भाषा में रचित तीन जातकों में राम कथा मिलती है जैन साहित्य में संस्कृत प्राकृत अप ब्रंश व् कन्नड़ भाषा में राम कथा सम्बन्धी रचित साहित्य है हिंदी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास रचित राम चरित मानस भक्ति काव्य है अन्य रचनाएँ जैसे भरत मिलाप रामचंद्रिका हनुमान नाट्य गोसाईं गुरुवाणी आदि है श्री दशम ग्रन्थ साहिब में राम अवतार में श्री राम के जनम से लेकर स्वर्गारोहण तक की पूरी कथा है प्रमुख कवी अगरदास नाभा दास बाबा राम स्नेही विश्वनाथ सिंह आदि का भी वर्णन है

Tulsi Or Govind Ke Ram Kavya

This book includes brief description of  Balmiki Ramayan to Ram katha literature and main characters of Ram Katha written in different languages of India. For example 1.  Maha Bharat, Puraan, Ram Katha, maha kavya, khund kavya, Vilom Kavya, Giti Kavya, Champu Kavya written in sanskrit 2. Ram Katha written in pali language of Bodh literature 3. Ram Katha written in sanskrit, Prakrit, upbhransh & kannad  of  jain literature 4. Ramcharit Manas written in Hindi by Goswami Tulsi dass. There are many other contributions various sects of early India. For example Bharat Milaap,  Ram Chandrika, Hanumaan natak, Gosaai Gur wani, Shri Dasham Guru Granth sahib which describes about  Ram from Birth to Swargarohan. During 18th & 19th century Ram Kavya was written in Punjabi.

During the end of 18th century, many eminent  poets & writers like Bhartendu Harish Chander, Balmukund Gupt, Radha Krishan Dass, Ram Charit Upaadhaya, Surya Kant Tripathi and Swami Satyanand jee had contributed in this subject.

 

 

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Punarmilan

पाकिस्तान की आधार शिला किसी ऊँचे आदर्श पर नहीं रखी गयी थी ! ब्रिटिश सरकार  ने जिन्नाह और मुस्लिम लीग के जिद पर पाकिस्तान बनाया था ! जिन्नाह जो मुंबई का रहने वाला था, उसको  ब्रिटिश सरकार ने पाकिस्तान को बतोर तोहफा दिया. पाकिस्तान को बनाने में और जिन्नाह की मुराद पूरी करने के पीछे प्रेरणा स्रोत मानव हरदे की निक्रिशत भावनाओं धरामंद्ता घृणा द्वेष स्वार्थ आदी थे !

पुनर्मिलन बंगला देश के मुक्ति आन्दोलन का जीवित सत्य है ! लेखिका ने बंगलादेश के आज़ादी के युद्ध और मुक्ति आन्दोलन  का चित्रण अत्यदिक प्रभावशाली और हरदया विदारक रूप से किया है ! पाकिस्तानी शासक याहिया खान और उसके बर्बर नौकर शाहों के अत्याचारों से  तंग आ कर मुस्लिम जन समुदाय का भारत की और शरण प्राप्ति के लिए प्रवाह इस उपन्यास में मनोविज्ञानिक रूप से किया गया है ! विक्षिप्त विद्वस्त परिवारों का फिर से पनपना क्रांति से झुलस  कर बच निकले सदस्यों का पुनर मिलन और घावों भरे हर्द्यों का विविद तथा प्रतिसपर्दी भावनाओं का शब्द चित्र विशेष आकर्षक है ! बिछुरे शिशु को पा कर मातरी हर्दय आनंद के आंसू बहता है ! सभी पात्रों का चित्रण उन की स्थिति के अनुरूप और सवाभाविक है आशा है हिंदी जगत इस उपन्यास को  यथा योग्य स्थान देगा

 

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Guru Teg Bahadur

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नेपाल यात्रा

कुछ समय पूर्व नेपाल एक हिन्दू राज्य था ! यह देश भव्य मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है ! इन मंदिरों का धार्मिक एतिहासिक व् सांस्कृतिक महत्व है ! इन के अतिरिक्त कई अन्य प्राकृत सौन्दर्य से परिपूर्ण स्थल भी हैं ! यहाँ पोर्वारा, मुक्तिनाथ धाम, काठमांडू, सिम्रंगढ़, देलेख व् जनकपुर दर्शनीय स्थान भी हैं ! महात्मा बुध हिन्दुओं के अवतार हैं और उनका जनम स्थान नेपाल है ! इस पुस्तक में इस महान देश के इतिहास  पर भी प्रकाश  डाला गया है ! इस के साथ यहाँ के वासी और यहाँ के रीति रिवाज व् पर्वों व् त्योहारों का उल्लेख  भी है !

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