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यादें

 तूफ़ान जब कर गया
हमारे इस कारवां को बर्बाद
तब बहुत देर से आई
शाययद उनको हमारी याद
जिसकी महक कम हो जाए
वोह गुलाब ही क्या
जो आशिक को झटक न दे
वोह शराब ही क्या
पीली पर्र्ड  चुकी पतियाँ  
कर रही हैं फ़रियाद तूफ़ान
जब कर गया तूफ़ान
जब कर गया हमारे इस कारवां को बर्बाद
तब  बहुत देर से आई शाययद उनको हमारी याद……. मोहन अलोक .

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