“बंटवारे दा इतिहास”
https://youtu.be/-t3pFSEKRLQ?si=qa4rULqBmWPR2m89
Lyrics by Cdr Alok Mohan,
Copyright (©) Cdr Alok Mohan
हथियारां नाल नहीं, विचारां नाल लडांगे,
हर ज़ुल्म नूं, असीं बोल के मिटांगे!
जे इन्साफ़ नहीं मिल्या, ओथे असी अपने शब्द,
नफरत दियां जंजीरां तोड़ के लिखां गे !
हर नेता नू जगाउना है,
समाज नू बंटवारे दा इतिहास सुनाना है
राजनीति दी जंग नू समझणा है,
बंटवारे दा जुल्म दिखाणा है।
जद साडा हक्क मिल जावे,
तां इक नवा समाज बनावांगे,
साडे हक्क, दी लड़ाइ,
आन वालीयां नसलां तक लै जावां गे !
हथियारां नाल नहीं, विचारां नाल लडांगे,
हर ज़ुल्म नूं, असीं बोल के मिटांगे!
जे इन्साफ़ नहीं मिल्या, ओथे असी अपने शब्द,
नफरत दियां जंजीरां तोड़ के लिखां गे !
साडे गीतां ‘च, साडी लहर बणू,
साडे शब्दां ‘च, इन्कलाब बणू!
ना कोई गरीब होवे, ना कोई रुल्लदा,
असीं सारे इकठे, इक कौम बणू!
साडे दिलां विच, अज्ज वी सूरमे बसदे,
साडे सुपने वी, आज़ादी दे रस्ते चलदे!
शब्दां दी गूंज, गोलियां बन जावण,
ज़ुल्म दी हर बेड़ी, हुण टूट जावण!
लहू दी हर बूँद, इंक़लाब बन जावे,
सच्चाई दे गीत, हर दिल विच गूंज जावण!
हंजूआं दे सवाल, हुण हथीयार बन जाण,
बेइंसाफ़ी दे अखर, हुण अग्ग बन जाण।
साडे प्यारे पिंड, साडे प्यारे शहर,
साडी मिट्टी पयाम देंदी, दुश्मन खामोश हो जाण !
हथियारां नाल नहीं, विचारां नाल लडांगे,
हर ज़ुल्म नूं, असीं बोल के मिटांगे!
जे इन्साफ़ नहीं मिल्या, ओथे असी अपने शब्द,
नफरत दियां जंजीरां तोड़ के लिखां गे !
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