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सांझ दी सौगंध

“सांझ दी सौगंध”

Lyrics by Cdr Alok Mohan,
Copyright (©) Cdr Alok Mohan
ओ मेरी जान, ओ मेरी जान,
तेरे बिना ए दुनियाँ वीरान।
तेरे ख्यालां दी छाँवें बैठा,
पर तू किते नज़र न आवें,
ओ मेरी जान ओ मेरी जान।

रब्बा कोई लकीर बनाई,
जित्थे असी इक हो जाईए,
हर जनम बस इक दूजे दे,
सिर्फ असी ही हो जाईए..!!

अच्छाई नाल वी नफरत कर बैठे, लोकी कई,
बुराई नाल वी  मोहब्बत  कर बैठे लोकी कई।
जदों संबंधां दी परिभाषा विच खो गए कई ,
सिर्फ मेहनत नाल ही,  शोहरत बढ़ गई, साडी।

क्यों नहीं मिलदी तू, इन दिनां च,
दिलां विच सवालां दा, लै के मेला।
की गल है, जो नई दसनी,
दिलां विच साडे, क्यूँ है  झमेला?

रब्बा ऐहो जादू करदे,
साडे दिल इक पासे करदे,
साँसां विच बसे, ओहदी मिठास,
हुन सानू इक करदे..!!
सदा ही रहां उस दे नाल,
इहो वादा करदे…!!

ओ मेरी जान ओ मेरी जान।
तेरे ख्यालां दी छाँवें बैठा,
पर तू किते नज़र न आवें,
ओ मेरी जान ओ मेरी जान।

चल छड्ड दुनियादारी, ओ सोहणिये ,
दिल विच बस, तू ही नाल मेरे रहना है ।
इश्क़ सच्चा है, तां आ मिल लईए,
रुहां नाल रुहां दी, गल्लां कर लईए!

इश्क़ दी बहारां विच, लिखिये इक ऐसी कहानी,
खामोशी नाल ही  खिलदी है , महकदी जवानी।
हवावां विच लहराए, तेरे प्यार दी खुशबू,
सांवा-सांवा होयी, दिल दी  मोहब्बत पुरानी ।

रातां दी चुपी विच, तेरा ही  ज़िक्र,
चन्न वी कहंदा मैनू,  तेरा फिक्र।
हवा सवाल करे जद, मिले हर वारी,
क्यों दूर होया सी तू , की मज़बूरी भारी?

रूहां विच बस गई तेरी आवाज़,
हर धड़कन विच तेरी ही आवाज़।
तेरे बिना ए दिल वीराना,
चन्न वी लगदा एे अनजाना ।

ओ मेरी जान ओ मेरी जान।
तेरे ख्यालां दी छाँवें बैठा,
पर तू किते नज़र न आवें,
ओ मेरी जान ओ मेरी जान।

तेरी गलियां आज वी मैनू  बुलाउन,
तेरे सारे  वादे, याद कर कर रुलाउन।
राहवां चल -चल थक गया मेरा दिल,
पर तू नहीं आयी, इस वी सावन !

दिल विच ख्वाबां दा एक जहान,
पर हकीकत विच तू अनजान।
मेरे होण विच, तेरा ही साया,
तेरे बिन जीवन, करदा एे परेशान ।

ओ मेरी जान, ओ मेरी जान,
तेरे बिना ए दुनियाँ वीरान।
तेरे ख्यालां दी छाँवें बैठा,
पर तू किते नज़र न आवे, ओ मेरी जान।

चुप रह के वी समझां गा,
हर एक तड़प, सह लवांगा,
तू साडे शहरां तों  दूर सही,
दिल विच हर दम रह लवांगा ..!!

सजदा करांगा  प्यार दा,
रब्ब अग्गे अरदास करावां गा,
जो मुक्क ना सके दुआवां नाल,
ओह प्यार तेरे  नाल करावां गा..!!

रूब रू हो के वी चुप रहणा,
अखाँ अखाँ च गल्ल नहीं करनी…
सौखा तां नहीं, पर फिर वी,
सानू तूँ अणजाण वांग  तकदी…

किसे अधूरी दास्तान वांग,
असां वी इक कहानी हां…
रहिण दे कुछ हाले फासले,
फिर मिलियां दिलां दी रूह बुलावांगे…

ओ मेरी जान ओ मेरी जान।
तेरे ख्यालां दी छाँवें बैठा,
पर तू किते नज़र न आवें,
ओ मेरी जान ओ मेरी जान।
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