How dare you minimize our losses

Written by Mohan on January 10, 2020. Posted in Uncategorized

As Received
Hi Maria James,

Thank you very much, indeed, for your e-mail (below) waiting about your loving father whose life was taken away by Islamic terrorists.

We express our sincere & heartfelt condolences. He was a hero who died for a good cause- freedom of man and dignity of woman.

Please spare a thought for the (nearly ONE BILLION) orphans (and widows) of Hindusthan (now Partitioned India) from 712 AD when a peace loving country, INDIA, was invaded by savage ARAB TERRORISTS commanded by MOHAMMED BIN QASIM, till- CENTURIES later, in 1947 AD, when they completed the ethnic cleansing of Hindus (and Sikhs) in ISLAMIC Pakistan.

In one year alone they massacred nearly two million innocent Hindus (and Sikhs) forcing tens of millions more out of their ancestral homes. They became refugees in their own country!

By the way, the world has not yet realised that an “ISLAMIC” Constitution that degrades and provokes the NON MUSLIMS living in each and every ISLAMIC Republic is a serious VIOLATION of the UN’s Human Rights Charter that regards all humans, irrespective of faith or religion, race or gender, EQUAL before Law.

10 January 2020
Qasem Soleimani took my father from me.

Thank you for being a supporter of critical national security policies. To keep receiving updates from us, please add us to your address book.
RS Rajput — I remember the rush of excitement that filled my body and sent me off the couch into a jumping fit as I re-read the head line “Saddam Hussein has been captured.” I was 14 years old. I still remember the crack in my mother’s voice as she whispered across the kitchen table “we got him,” in reference to the attack that killed Abu Musab al-Zarqawi, the then-leader of Al-Qaeda, in 2006. I was 16. I will never forget the tears of relief that rolled down my face at a dinner party when I received a text message that said “Osama is DEAD! Check Twitter!” I was 21 years old.

Just last week I had another one of these out-of-body emotional responses to the death of a known terrorist – Gen. Qasem Soleimani.

This one was even more freeing because for 14 years I have wanted to see and know the face of the bomb maker or the individual that was responsible for the death of my father, LTC. Leon G. James.

I hold Qasem Soleimani and the Iranian terrorist regime responsible for the death of my father. I would like for Nancy Pelosi, AOC, or the pundits at CNN to look me in the face when they say that the President wasn’t acting in the interest of the American people by removing Soleimani from the face of the planet. He was certainly acting in the interest of my family and of the 607 others whose loved ones were killed as a result of Soleimani’s efforts in Iraq. How dare you minimize our loss or his evil.

Kyya khoya

Written by Mohan on November 1, 2019. Posted in Uncategorized

मुझसे ख़फ़ा थी तू,

पर यह तो बता

मुझे खो कर
तूने क्या खोया
क्या पाया
किसके लिए
मुझे छोड़ के
यह दिल दुखाया

रंजिश ही सही,

हम से किसके लिए
तूने इस शमा को
किस किस को बताएँ इस

राहते-जहाँ ने क्यूँ रुलाया

इक उम्र से

इंतजार में हूँ

तुझे दिखाने के लिए

की हमें छोड़ तूने

क्या खोया क्या पाया

मुझसे ख़फ़ा थी तू,

पर यह तो बता

मुझे खो कर
तूने क्या खोया
क्या पाया

~ मोहन आलोक


Written by Mohan on September 4, 2019. Posted in Uncategorized


Every country on earth honors its dead EXCEPT Bharat. There is NO memorial anywhere to recall the dead of Noakhali nor one to remind us of the massacres in WEST Pakistan in 1947.

Why do the HINDU leaders & rulers think that we HINDUS are no more than the cattle though there are people who put up memorials even for their dead dogs. Are our (HINDU) dead WORSE THAN DOGS?

Can’t we see the memorials to their dead in the UK, the USA, Canada, Australia, even RUSSIA, and in every honourable and brave country on earth?

4 Sep 19
It ought to be recalled that hundreds, if not thousands of females were abducted on BOTH sides at Partition. Then an order came to every district in Bharat, asking the police to track down the abducted MUSLIM females and return them to Pakistan.

What happened then? Pandit Nehru ENFORCED this order rigorously across Bharat, especially in Delhi and EAST Punjab. Every Muslim female was tracked down and then sent to Pakistan.

What happened on the OTHER side? Not ONE Hindu or Sikh girl or woman was recovered for return to their parents, grandparents or relatives in “BLEEDING, BROKEN” Bharat. The Pakistani authorities simply declared, “THEY HAVE ALL EMBRACED ISLAM AND ARE HAPPILY MARRIED AND MOST ARE NOW PREGNANT.”

It is shocking and most saddening to recall our sisters and daughters who spent all lives in the realm of “Rasul Allah” yearning to see their lost families, even to visit a mandir or gurdwara. What kind of a nation or government can be so callous towards their own daughters, sisters and mothers?

Many Hindus and Sikhs CURSED Nehru for this BETRAYAL, first of India, then of our noble females (“devis”) in the clutches of uncouth savages & barbarians.

4 Sep 2019

*कौन था जिन्ना*

Written by Mohan on June 29, 2019. Posted in Uncategorized

*कौन था जिन्ना*

जिन्ना का दोष यही था कि उसने मुसलमानों को सीधे क़त्ले आम कर के पाकिस्तान लेने का निर्देश दिया ! वह चाहता तो यह क़त्ले आम रुक सकता था लेकिन उसे मुसलमानों की ताक़त दर्शानी थी !
बहुत कठोर पोस्ट है पर जानना जरूरी है,
“जिन्ना” को।
.16 अगस्त 1946 से दो दिन पूर्व ही
जिन्ना नें “सीधी कार्यवाही” की धमकी दी थी. गांधीजी को अब भी उम्मीद थी कि जिन्ना सिर्फ बोल रहा है, देश के मुश्लिम इतने बुरे नहीं कि ‘पाकिस्तान’ के लिए हिंदुओं का कत्लेआम करने लगेंगे। पर गांधी यहीं अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल कर रहे हैं, सम्प्रदायों का नशा शराब से भी ज्यादा घातक होता है।
बंगाल और बिहार में मुश्लिमों की संख्या अधिक है, और लीग की पकड़ भी यहाँ मजबूत है।
बंगाल का मुख्यमंत्री शाहिद सोहरावर्दी जिन्ना का वैचारिक गुलाम है, जिन्ना का आदेश उसके लिए खुदा का आदेश है।
पूर्वी बंगाल का मुश्लिम बहुल्य नोआखाली जिला! यहाँ अधिकांश दो ही जाति के लोग हैं, गरीब हिन्दू और मुस्लिम। हिंदुओं में पंचानवे फीसदी पिछड़ी जाति के लोग हैं, गुलामी के दिनों में किसी भी तरह पेट पालने वाले।
लगभग सभी जानते हैं कि जिन्ना का “डायरेक्ट एक्शन” यहाँ लागू होगा, पर हिन्दुओं में शांति है। आत्मरक्षा की भी कोई तैयारी नहीं। कुछ गाँधी जी के भरोसे बैठे हैं। कुछ को मुस्लिम अपने भाई लगते हैं, उन्हें भरोसा है कि मुस्लिम उनका अहित नहीं करेंगे।
सुबह के दस बज रहे हैं, पर सड़क पर नमाजियों की भीड़ अब से ही इकट्ठी हो गयी है। बारह बजते बजते यह भीड़ तीस हजार की हो गयी, सभी हाथों में तलवारें हैं।
मौलाना मुसलमानों को बार बार जिन्ना साहब का हुक्म पढ़ कर सुना रहा है- “बिरदराने इस्लाम! हिंदुओं पर दस गुनी तेजी से हमला करो…”
मात्र पचास वर्ष पूर्व ही हिन्दू से मुसलमान बने इन मुसलमानों में घोर साम्प्रदायिक जहर भर दिया गया है, इन्हें अपना पाकिस्तान किसी भी कीमत पर चाहिए।
एक बज गया। नमाज हो गयी। अब जिन्ना के डायरेक्ट एक्शन का समय है। इस्लाम के तीस हजार सिपाही एक साथ हिन्दू बस्तियों पर हमला शुरू करते हैं। एक ओर से, पूरी तैयारी के साथ, जैसे किसान एक ओर से अपनी फसल काटता है। जबतक एक जगह की फसल पूरी तरह कट नहीं जाती, तबतक आगे नहीं बढ़ता।
जिन्ना की सेना पूरे व्यवस्थित तरीके से काम कर रही है। पुरुष, बूढ़े और बच्चे काटे जा रहे हैं, स्त्रियों-लड़कियों का बलात्कार किया जा रहा है।
हाथ जोड़ कर घिसटता हुआ पीछे बढ़ता कोई बुजुर्ग, और छप से उसकी गर्दन उड़ाती तलवार…
माँ माँ कर रोते छोटे छोटे बच्चे, और उनकी गर्दन उड़ा कर मुस्कुरा उठती तलवारें…
अपने हाथों से शरीर को ढंकने का असफल प्रयास करती बिलखती हुई एक स्त्री, और राक्षसी अट्टहास करते बीस बीस मुसलमान… उन्हें याद नहीं कि वे मनुष्य भी हैं। उन्हें सिर्फ जिन्ना याद है, उन्हें बस पाकिस्तान याद है।
शाम हो आई है। एक ही दिन में लगभग 15000 हिन्दू काट दिए गए हैं, और लगभग दस हजार स्त्रियों का बलात्कार हुआ है।
जिन्ना खुश है, उसके “डायरेक्ट एक्शन” की सफल शुरुआत हुई है।
अगला दिन, सत्रह अगस्त….
मटियाबुर्ज का केसोराम कॉटन मिल! जिन्ना की विजयी सेना आज यहाँ हाथ लगाती है। मिल के मजदूर और आस पास के स्थान के दरिद्र हिन्दू….
आज सुबह से ही तलवारें निकली हैं। उत्साह कल से ज्यादा है। मिल के ग्यारह सौ मजदूरों, जिनमें तीन सौ उड़िया हैं को ग्यारह बजे के पहले ही पूरी तरह काट डाला गया है। मोहम्मद अली जिन्ना जिन्दाबाद के नारों से गगन गूंज रहा है…
पड़ोस के इलाके में बाद में काम लगाया जाएगा, अभी मजदूरों की स्त्रियों के साथ खेलने का समय है।
कलम कांप रही है, नहीं लिख पाऊंगा। बस इतना जानिए, हजार स्त्रियाँ…
अगले एक सप्ताह में रायपुर, रामगंज, बेगमपुर, लक्ष्मीपुर…. लगभग एक लाख लाशें गिरी हैं। तीस हजार स्त्रियों का बलात्कार हुआ है। जिन्ना ने अपनी ताकत दिखा दी है….
हिन्दू महासभा “निग्रह मोर्चा” बना कर बंगाल में उतरी , और सेना भी लगा दी। कत्लेआम रुक गया .
बंगाल बिधान सभा के प्रतिनिधि हारान चौधरी घोष कह रहे हैं,” यह दंगा नहीं,मुसलमानों की एक सुनियोजित कार्यवाही है, एक कत्लेआम है।
गांधीजी का घमंड टूटा, पर भरम बाकी रहा। वे वायसराय माउंटबेटन से कहते हैं, “अंग्रेजी शासन की फूट डालो और राज करो की नीति ने ऐसा दिन ला दिया है कि अब लगता है या तो देश रक्त स्नान करे या अंग्रेजी राज चलता रहे”।
सच यही है कि गांधी अब हार गए थे. जिन्ना जीत गया था।
कत्लेआम कुछ दिन के लिए ठहरा भर था। या शायद अधिक धार के लिए कुछ दिनों तक रोक दिया गया था.
6 सितम्बर 1946…

गुलाम सरवर हुसैनी लीग का अध्यक्ष बनता है, और सात को शाहपुर में कत्लेआम दुबारा शुरू…
10 अक्टूबर 1946
कोजागरी लक्ष्मीपूजा के दिन ही कत्लेआम की तैयारी है। नोआखाली के जिला मजिस्ट्रेट M J Roy रिटायरमेंट के दो दिन पूर्व ही जिला छोड़ कर भाग गए हैं। वे जानते हैं कि जिन्ना ने दस अक्टूबर का दिन तय किया है, और वे हिन्दू हैं।
जो लोग भाग सके हैं वे पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और आसाम के हिस्सों में भाग गए हैं, जो नहीं भाग पाए उनपर कहर बरसी है। नोआखाली फिर जल उठा है।
लगभग दस हजार लोग दो दिनों में काटे गए हैं। इस बार नियम बदल गए हैं। पुरुषों के सामने उनकी स्त्रियों का बलात्कार हो रहा है, फिर पुरुषों और बच्चों को काट दिया जाता है। अब वह बलत्कृता स्त्री उसी राक्षस की हुई जिसने उसके पति और बच्चों को काटा है।
एक लाख हिन्दू बंधक बनाए गए हैं। उनके लिए मुक्ति का मार्ग निर्धारित है, “गोमांस खा कर इस्लाम स्वीकार करो और जान बचा लो”।
एक सप्ताह में लगभग पचास हजार हिंदुओं का धर्म परिवर्तन हुआ है।
जिन्ना का “डायरेक्ट एक्शन” सफल हुआ है, नेहरू और पटेल मन ही मन भारत विभाजन को स्वीकार कर चुके हैं।
सत्तर साल बाद……

“जिन्ना सेकुलर थे।” ऐसा कहने वाले
अय्यर हो या सर्वेश तिवारी हों या कोई अन्य हो, भारत की धरती पर खड़े हो कर जिन्ना की बड़ाई करने वाले से बड़ा गद्दार इस विश्व में दूसरा कोई नहीं हो सकता.।
शेअर कीजिए इस पोस्ट को ताकि सेक्युलर हिन्दुओ को पता तो चले कि कौन था जिन्नाह

🙏🙏राणा जी 🙏🙏

A Tribute to the tallest leadership of this century

Written by Mohan on May 5, 2019. Posted in Uncategorized

I am not a professional writer. I wish to write a few words on Modi as a humble tribute to the tallest leader of this century as an acknowledgement of gratitude & respect.
I remember this was the year 2005 month April.I had retired from the aviation wing of Indian Navy. I shifted my house from government

Backward March of Islam

Written by Mohan on April 29, 2019. Posted in Uncategorized

As Received



Today, Sunday, April 28, 2019, all places of Catholic worship in Sri Lanka are closed. These should have been open and full of happy families, in colourful dresses, singing and praying for peace on earth. But the Christians in the “paradise” island are confined to their own homes for praying.

So it was appropriate to recall the slogan of Audi car makers, “Vorsprung durch Technik” (Leap FORWARD through technology) and turn it around, to describe Islam of today as Rapid REGRESSION through “JEHALAT”- not only in Sri Lanka but in West Punjab, East Bengal and in the homeland of the peace loving Yazidis, too.

We can prove the point by mentioning the recent murders of the following at the hands of Islamic fundamentalists, that is, those who were brainwashed and conditioned by the teachings of KORAN.

The murder of drummer Lee Rigby in London, the beheading of UN aid workers Alan Henning and David Haines, American journalist James Foley, and Daniel Pearl, the journalist for The Wall Street Journal, who was kidnapped and later beheaded by terrorists in Pakistan.

Every time the anger in the world turned into confusion when the Muslim spokespersons, mostly well dressed “schick” and elegant ladies of media described Islam as the ”religion of peace”.

Not satisfied with this reassurance we decided to take the INITIATIVE, that is, to go into the head and mind of the suicide bomber and then see the world through HIS eyes. It has never been done before.

We saw the intended victims as dangerous beasts or members of “SS Waffen” (elite German troops) who were brandishing swords & guns, converging on us!

Quite a revolutionary idea. What is the proof?

The proof of the pudding is in eating! So we entered the head of that young Muslim who jumped into the lions’ enclosure at the zoo at Delhi. Some readers may be able to recall the incident.

He really thought that the cuddly friendly animal was asking him to come down to play with him!

The indoctrinated Arabs who flew their planes into World Trade Centre towers in New York genuinely believed that Satan (“Shaitaan”) lived there who was planning to fly to Mecca to throw bombs at the Holy mosque!

To test the theory we went to mental wards in hospitals where psychiatrists & doctors told us about each and every patient. We learnt that the patient believes (not merely imagines!) that his mother wants to poison him, another sees the doctors as wolves.

In one case a patient escaped the ward to run to the police station where he said, “My father is Hitler. Please arrest him!”

Each suicide bomber or murderer was genuinely CONVINCED that he was not killing HUMAN beings but his sworn enemies, who were worse than animals.

This is the BREAKTHROUGH that the world has been waiting for. TRY IT YOURSELF!

Enter the head of the Jehadi and look at your surroundings. You couldn’t sleep in peace if you BELIEVED (not imagined) that all the Jews, Christians, Hindus and Infidels were closing in on you and your family, and they are determined to reduce you to smouldering ambers and ashes.

When the Koranic “Wahn” takes over, the “Believer” thinks and acts like the wolf who runs off with the suckling lamb without any remorse. The non Muslims in WEST Punjab and the YAZIDIS in Syria suffered murder, rape and plunder, not by “normal” Muslims but by those whose schizophrenia had progressed to advanced stage.

A few more examples can be cited:

Jehadis happily beheading INNOCENT hostages while leaving their own wives and children behind for good without even saying “Goodbye”.

The RANT about “Islam is in danger!“ (“Islam khatray mein hai!”) that became the powerful motivation to break up India inTO three fragments overnight in order to create Islamic Pakistan on either side!

Now they have created a new challenge for the whole world. It is “Khatm-e-nabuwwat”. (

Khatme Nubuwwat means that “Muhammad is the Last of the Prophets. The process and routine of appointing Prophets and Messengers by Almighty Allah has been terminated, finished, ended, stopped, and sealed.”

So Allah must be “koochak, sagheer, heech” or “kamm-tar” (“small” in Persian), but NOT “Akbar” (meaning GREAT!) if He cannot send another Prophet to our earth!

This Ordinance (now Law in Pakistan) is going to cost a few lives of those who will dare to say, “If God is Almighty then surely he can send not one but more Prophets to earth!” There will be prompt arrest, summary trial and instant execution if the wild bloodthirsty mobs don’t get to him first!


We seriously believe that an intensive study of the Koran causes the mental illness of Schizophrenia in a “Believer”.

The degree of illness is different with each Muslim- from mild (like Dr Abdul Kalam, the former “secular” President of Partitioned India, that allowed him to win confidence of the Hindu nation), to the extreme where the compulsion arises to kill, behead, abduct, rape and destroy, and then get blown up in order to get the reward in paradise.

Each and every Muslim on earth (with NO exception!), who does intensive study of Koran, suffers from SCHIZOPHRENIA, from the small, unnoticeable degree to the extreme where the brainwashed “Believer” genuinely thinks that his holy mission is more valuable than the entire mankind.

Let us quote two intellectual “giants” of our recent past:



Today we can see how right these leaders were!


Now we see the whole of MIDDLE EAST, The Holy “REICH” of MOHAMMED, on “fire” where the Muslims are killing fellow Muslims (Yemen, Libya, Afghanistan, even Pakistan) since there is hardly a Christian or Jew left alive in these countries.

28 Apr 2019


Written by Mohan on January 31, 2019. Posted in Uncategorized

Although in terms of history partition took place a split second ago, in terms of human life it is more than a whole generation away. Those born in 1947 have already retired at the age of 65 in 2012!

Hence reflections based on personal experience or direct memory of those few who can still recall and re-live those days are worth all the gold on earth and should be sought, cherished and recorded for posterity. It is our national heritage.
Nehru Dynasty and their corrupt Congress Party (of “Italy & Islam”) have “played hell” with Truth and Reality about that bogus Partition whose only aim was to weaken the country through fragmentation, and demoralise the natives of the land by empowering and strengthening the enemies of Hindus, Secularism and Bharat.

Hence the onus is upon genuine patriots and the senior citizens to do maximum input in the stock of knowledge of the ignorant masses- kept ignorant by State design.

Since the prophets mould the belief of their followers and leaders determine the course of history of countries let us look at Bharat’s “Father of Nation”, MK Gandhi, who was assassinated by a patriot on 30th. January 1948.
Logic dictated that Gandhi should have been deleted from public memory like Hitler and Mussolini but our Hindu nation did the OPPOSITE. They took the corpse (dead body) of Gandhi to their bosom and adored and praised him day and night despite the stink that rose from it.

Why are the Indians so different from the patriotic Germans and the honourable Italians who have discarded Hitler and Mussolini in perpetuity? Because the Indians are among the MOST ignorant (stupid) people on earth!
Further to the previous posting earlier today, “WHERE ON EARTH DO THEY CALL A COWARD A NATIONAL HERO?”, we submit SEVEN more reasons for demoting Gandhi immediately and giving a fresh start to the much betrayed and wounded Hindu nation, facing extinction in Partitioned India.

1. Some Hindus, seeing All-India MUSLIM League invited to discuss the fate of post-British India, wanted All-India HINDU Mahasabha, too, invited to those talks. Gandhi nipped the idea in the bud, saying, “No need at all, since my Congress Party speaks for the Hindus, too.”

2. When Mr Jinnah passed the Pakistan Resolution at Lahore on March 23, 1940, Gandhi could have demonstrated his loyalty towards Akhand (United) Bharat by condemning him in public for High Treason. He could have warned Jinnah by saying, “We shall force every Muslim to move to Pakistan.” In the event Gandhi told Jinnah, “Even if you bite me a hundred times like the drowning scorpion, I will still save you from drowning in the river. I shall make sure that not one Muslim is forced to leave India even if all the Hindus are massacred in your Pakistan.”

3. Gandhi was neither a Punjabi, nor a Bengali, Sindhi, Baloch or Pathan, and nor even a Kashmiri. So he felt absolutely no remorse, regret or shame when he saw Sindh, Balochistan and NWFP “gone”, and Kashmir, Punjab and Bengal partitioned, bleeding and AFLAME, going through history’s worst ever BLOODBATH and human migration.

And yet he is hailed by the Hindus with the awareness of the cattle, as the “Bravest man on earth who snatched our Independence from the British!”

4. Leaders must FORESEE the consequences of their words and deeds. Gandhi could not foresee the constitutional status of the Muslims in PARTITIONED India nor the effects of dividing the Indian Muslims into two (eventually THREE) countries!

5. Gandhi had no clue, like a cow grazing in the field, to the future plight of the Hindus in an Islamic State (Pakistan) under SHARIA LAW. Had he never heard of the Muslim invaders like Mahmud of Ghazni and Babur who proceeded against the temples, or of Emperor Aurangzeb who ordered the BEHEADING of Guru Tegh Bahadur? WHY did the “intellectual mouse” and moral coward not foresee the REPEAT of the Holocaust of Hindus in Noakhali before going SILENT over “Partition” a year later?

6. Flying in the face of reality Gandhi condemned the use of arms to defend oneself and one’s country. Only after desperate pleas by the Parliament of India did he finally acquiesced in sending troops to save SRINAGAR when the invaders were a few miles away, having overrun North Kashmir! All our heroes, who FOUGHT with arms, or commended WAR, to submission & surrender, including Shivaji and Guru Gobind Singhji, met with his disapproval! His advice for Sri Ram was, “Don’t go to war against Ravan for one woman!” and to fellow Indians in 1942 was, Better lie down in front of the advancing Japanese tanks instead of offering resistance,” and to his fellow Hindus in 1947 was, “Accept Partition. Avoid Civil War!”

7. All great men know their finest hour: Jesus Christ on Cross, Guru Tegh Bahadur under the Mogul’s sword and the brave Rajput girls and women when they jumped into fire to save their dignity while Gandhi did NOTHING to save the dignity and integrity of our Hindusthan but watched the death of Hindus and the mutilation of Bharat.
He had NO character, courage or honesty to say to Bharat Mata and to his fellow Hindus, while dying, “PLEASE FORGIVE ME. I HAVE BETRAYED YOU!”



Written by Mohan on January 30, 2019. Posted in Uncategorized

CURSED & degraded is the land where a Coward is held in much higher esteem than his country of birth, especially when that country is renowned as the cradle of civilisation, as an ancient civilisation, as the epitome of tolerance and secularism, and as the fountainhead of world’s most divine Spirituality (religions).
Today the Parliament of India (Lok Sabha) and all the prime minister’s cabinet will shed tears and mourn the death of a man who broke his solemn Oath (“India will be partitioned over my dead body!”) within days but did not spare a second’s thought on the most humiliating unconditional surrender (“murder”) of Lahore, Multan and the whole of East Bengal that took place two years after the end of World War 2.
One billion Hindus who adore MK Gandhi with copious compliments and profuse homage (“shardhanjali”), by constructing numerous statues all over Bharat and abroad, and naming roads, institutions, buildings, even a city in Gujerat State (“Gandhi Nagar”), IGNORE the reality that a mere one square inch of sacred “dharti” (land) in Bhagat Prahlad’s city (Multlan), or at the Janmasthan of Guru Nanak Devji (Sri Nankana Sahib), is a BILLION TRILLION times more sacred and precious than the fraudulent “sarkari” Mahatma, MohandasKaramchand Gandhi, who threatened to go on fast unto death if 35 crore rupees were not remitted to Pakistan on the very day when Pakistani raiders were killing and raping the Kashmiri Hindus and rapidly advancing towards Srinagar!
Our “fake” mahatma did not protest Partition (“death of Akhand Bharat”) by undertaking even one minute’s fast, nor did he (the barrister-in-law from London) dictate even one condition of that surrender (for example “complete exchange of population!”).
What patriotism, what calibre of the entire NATION, where not one dissenting voice will protest but everybody who is somebody will be seen cursing the real patriot, Shri Nathu Ram Godse, who put MOTHER (India) above an appeaser, the defeatist, who BETRAYED both, the country and the people!
Millions lost their lives, millions lost everything they possessed, millions cried for their daughters and young wives who had been abducted, raped and forcibly CONVERTED or killed, and millions were forced out of their ancestral homes when the whole nation was looking towards just ONE man (“Mahatma” Gandhi) to offer his head for “DHARTI & DHARMA” like Guru Tegh Bahadur!
Question: Shouldn’t there be AS MANY memorials to the innocent Hindus (and Sikhs) killed, raped, converted and thrown out of their ancestral homes as there are statues of Gandhi in “Broken” Bharat?

30 January 2019
PS: The above may be written by one man but it is the voice of the tens of millions of Hindus and Sikhs in India who either perished when
Gandhi “died” morally, or fled in all directions in three clothes in order to save their lives and daughters. Please ask any survivor from
Noakhali, Lahore, Multan or Rawalpindi!
NB: Please compare two maps, one pre-partition and the other post-partition, i.e., the one of the India in which Gandhi was born and the other of the “Partitioned Indian Secular State” (the defeated country) in which he died, and see the “mahatma-made” disaster that will put us all to SHAME till eternity

These were our ancestors

Written by Mohan on January 29, 2019. Posted in Uncategorized

Sharing contents of an important E mail received on the subject:-
I don’t really want to start exchanging emails with Chauhan from Sainiksangh, and since you asked me to respond, I’m sending this to you. I hope you don’t mind. My views are:
It is true that different opinions are prevalent on the question of the linguistic origins of the words ‘Hindu’ , ‘India’ and ‘Indian’. Actually, even on ‘Bharatiya’, ‘Hindustan’ and ‘Hindutva’.
‘Hindu’ , ‘India’ and ‘Indian’ all originate from the Sindhu River, which also gives its name to the Sind region (now in Pakistan). ‘Sindhu’ is a Sanskrit word meaning ‘the sea’ and was used since ancient times. The ancient Chinese called India ‘Shendu’ (Shindhu in Bengali) after the Sindhu. In 126 BC the Chinese traveller Zhang Qian described his travels in Bactria, adding that the market place had products from China & India or ‘Shendu’.
Linguists are well aware that in some languages ‘Sind’ becomes ‘Ind’, and in others ‘Ind’ becomes ‘Hind’. So the Sindhu River became the modern-day River Indus , thanks to the ancient Greeks. The Greek historian Megasthenes (5th century BC) used the word ‘India’ to mean the land east of the Indus River. The Greeks called the Hindu Kush ‘Caucuses Indicus’ or ‘Indian Caucuses’.
In Arabic ‘Al Hind’ means ‘India’ because the Arabs mispronounced ‘India’. The word ‘Hindustan’, meaning ‘land of the Hindus’ or ‘India’ came about very much later (by the 13th century).
Chauhan says ‘be proud of our ancestors’ and that ‘they were not Hindus’. I am certainly proud of those great men and women who gave us all our sacred Literature – Vedic and post-Vedic. Within this Literature I count also all the wonderful sacred texts that are Jain, Buddhist and Sikh. They may not have called themselves ‘Hindus’, but I do when I speak of them in English. But I also call them Sanatana Dharma followers.
Our Vedic ancestors would have called our religion ‘Sanatana Dharma’ and ‘Arya Dharma’, as ‘Hindu’ from the word ‘Sindhu’ would have denoted a geographical term to them. But language is dynamic and so it is constantly evolving. So today those who use the word ‘Hindu’, no longer use it in a geographical sense, so why turn back the clock? By ‘Hindu’ they mean a follower of Sanatana Dharma. I see nothing wrong in this. I may prefer the term ‘Sanatana Dharma’, but ‘Hindu Dharma’ is also fine. During British times, ‘Hindu Dharma’ became Hinduism because in English any religion is an ‘ism’. So when we are speaking in English, it is interchangeable to say ‘Sanatana Dharma’ and ‘Hinduism’. But in the indigenous languages of India, it doesn’t make much sense to talk of ‘Hinduism’ when we have perfectly good terms like ‘Sanatana Dharma’ and ‘Arya Dharma’. Swami Vivekananda, one of the greatest modern exponents of Sanatana Dharma, was the first to popularise the term ‘Hinduism’ when he spoke in English in the 19th century.
Incidentally, another related term with a different meaning, ‘Hindutva’, was first coined by Chandranath Basu and popularised by the politician & freedom fighter Veer Savarkar in the 21st century.
Amit, my friend, I hope this clarifies things a little. But Chauhan is perfectly at liberty to hold on to his own views and I would not wish to waste my time debating with him.
Joy Maa Shakti!

I admire you for clarity of thinking and conveying so much in so few words.
The line, “Hinduism, one of the ancient religions, is on the decline.”, is the most eloquent explanation for the repeated surrenders of LAND and SOULS plus the loss of unity, identity and MANHOOD (and the perpetual rule of FOREIGNERS over us).

If there is wisdom among the current leaders, they will now know what needs to be done on highest priority.



Appreciate the review by Debjani ji,

Once again, I am attaching the book written 26 years ago, while researching in the very well stocked library of Staff College during the fag end of my career, as additional reading material.

May I draw your attention to the Chapter on “Secularism” that not only covers “Hindu and Hinduism” but also Islam, Christianity and Sikhism.

My finding is simple. Hinduism, one of the ancient religion, is on the decline. To save, consolidate and advance it in the land of its origin, it must reform internally which is not easy due to caste rigidity.

More importantly, the cash rich temples of Hinduism must fund construction of “Temples” with schools and medical facilities in the same complex in each Panchayat like what the Churches and Convents co-existing.

Best wishes,

Yours Sincerely

G B Reddy

Role of Gandhi- From the Prism of Godse

Written by Mohan on January 17, 2019. Posted in Uncategorized

क्या था गांधी वध का वास्तविक कारण ?
क्या हुआ 30 जनवरी की रात्री को … पुणे के ब्राह्मणों के साथ ? क्या था सावरकर और हिन्दू महासभा का चिन्तन ?
क्या हुआ गोडसे के बाद नारायण राव आप्टे का .. कैसी नृशंस फांसी दी गयी उन्हें l
यह लेख पढने के बाद कृपया बताएं कैसे उतारेगा भारतीय जनमानस पंडित नाथूराम गोडसे जी का कर्ज….
आइये इन सब सवालों के उत्तर खोजें ….
पाकिस्तान से दिल्ली की तरफ जो रेलगाड़िया आ रही थी, उनमे हिन्दू इस प्रकार बैठे थे जैसे माल की बोरिया एक के ऊपर एक रची जाती हैं। अन्दर ज्यादातर मरे हुए ही थे, गला कटे हुए
रेलगाड़ी के छप्पर पर बहुत से लोग बैठे हुए थे, डिब्बों के अन्दर सिर्फ सांस लेने भर की जगह बाकी थी l बैलगाड़िया ट्रक्स हिन्दुओं से भरे हुए थे, रेलगाड़ियों पर लिखा हुआ था,,” आज़ादी का तोहफा ” रेलगाड़ी में जो लाशें भरी हुई थी उनकी हालत कुछ ऐसी थी की उनको उठाना मुश्किल था, दिल्ली पुलिस को फावड़ें में उन लाशों को भरकर उठाना पड़ा l ट्रक में भरकर किसी निर्जन स्थान पर ले जाकर, उन पर पेट्रोल के फवारे मारकर उन लाशों को जलाना पड़ा इतनी विकट हालत थी उन मृतदेहों की… भयानक बदबू……

सियालकोट से खबरे आ रही थी की वहां से हिन्दुओं को निकाला जा रहा हैं, उनके घर, उनकी खेती, पैसा-अडका, सोना-चाँदी, बर्तन सब मुसलमानों ने अपने कब्जे में ले लिए थे l मुस्लिम लीग ने सिवाय कपड़ों के कुछ भी ले जाने पर रोक लगा दी थी. किसी भी गाडी पर हल्ला करके हाथ को लगे उतनी महिलाओं- बच्चियों को भगाया गया.बलात्कार किये बिना एक भी हिन्दू स्त्री वहां से वापस नहीं आ सकती थी … बलात्कार किये बिना…..?

जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आई वो अपनी वैद्यकीय जांच करवाने से डर रही थी….

डॉक्टर ने पूछा क्यों ???

उन महिलाओं ने जवाब दिया… हम आपको क्या बताये हमें क्या हुआ हैं ?

हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं हमें भी पता नहीं हैं…उनके सारे शारीर पर चाकुओं के घाव थे।

“आज़ादी का तोहफा”

जिन स्थानों से लोगों ने जाने से मना कर दिया, उन स्थानों पर हिन्दू स्त्रियों की नग्न यात्राएं (धिंड) निकाली गयीं, बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं और उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया l

1947 के बाद दिल्ली में 400000 हिन्दू निर्वासित आये, और इन हिन्दुओं को जिस हाल में यहाँ आना पड़ा था, उसके बावजूद पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने ही चाहिए ऐसा महात्मा जी का आग्रह था…क्योकि एक तिहाई भारत के तुकडे हुए हैं तो भारत के खजाने का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान को मिलना चाहिए था l

विधि मंडल ने विरोध किया, पैसा नहीं देगे….और फिर बिरला भवन के पटांगन में महात्मा जी अनशन पर बैठ गए…..पैसे दो, नहीं तो मैं मर जाउगा….एक तरफ अपने मुहँ से ये कहने वाले महात्मा जी, की हिंसा उनको पसंद नहीं हैं l

दूसरी तरफ जो हिंसा कर रहे थे उनके लिए अनशन पर बैठ गए… क्या यह हिंसा नहीं थी .. अहिंसक आतंकवाद की आड़ में

दिल्ली में हिन्दू निर्वासितों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी, इससे ज्यादा बुरी बात ये थी की दिल्ली में खाली पड़ी मस्जिदों में हिन्दुओं ने शरण ली तब बिरला भवन से महात्मा जी ने भाषण में कहा की दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश हैं मस्जिद जैसी चीजों पर हिन्दुओं का कोई

ताबा नहीं रहना चाहिए l निर्वासितों को बाहर निकालकर मस्जिदे खाली करे..क्योंकि महात्मा जी की दृष्टी में जान सिर्फ मुसलमानों में थी हिन्दुओं में नहीं…

जनवरी की कडकडाती ठंडी में हिन्दू महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर पुलिस ने मस्जिद के बाहर निकाला, गटर के किनारे रहो लेकिन छत के निचे नहीं l क्योकि… तुम हिन्दू हो….

4000000 हिन्दू भारत में आये थे,ये सोचकर की ये भारत हमारा हैं…. ये सब निर्वासित गांधीजी से मिलाने बिरला भवन जाते थे तब गांधीजी माइक पर से कहते थे क्यों आये यहाँ अपने घर जायदाद बेचकर, वहीँ पर अहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं रहे ?? यही अपराध हुआ तुमसे अभी भी वही वापस जाओ..और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने निकले थे ?

कैसा होगा वो मोहनदास करमचन्द गाजी उर्फ़ गंधासुर … कितना महान …

जिसने बिना तलवार उठाये … 35 लाख हिन्दुओं का नरसंहार करवाया

2 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं का इस्लाम में धर्मांतरण हुआऔर उसके बाद यह संख्या 10 करोड़ भी पहुंची l

10 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को खरीदा बेचा गया l

20 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया, तरह तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाओं के बाद

ऐसे बहुत से प्रश्न, वास्तविकताएं और सत्य तथा तथ्य हैं जो की 1947 के समकालीन लोगों ने अपनी आने वाली पीढ़ियों से छुपाये, हिन्दू कहते हैं की जो हो गया उसे भूल जाओ, नए कल की शुरुआत करो …

परन्तु इस्लाम के लिए तो कोई कल नहीं .. कोई आज नहीं …वहां तो दार-उल-हर्ब को दार-उल-इस्लाम में बदलने का ही लक्ष्य है पल.. प्रति पल

विभाजन के बाद एक और विभाजन का षड्यंत्र …


आपने बहुत से देशों में से नए देशों का निर्माण देखा होगा, U S S R टूटने के बाद बहुत से नए देश बने, जैसे ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान आदि … परन्तु यह सब देश जो बने वो एक परिभाषित अविभाजित सीमा के अंदर बने l

और जब भारत का विभाजन हुआ .. तो क्या कारण थे की पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान बनाए गए… क्यों नही एक ही पाकिस्तान बनाया गया… या तो पश्चिम में बना लेते या फिर पूर्व में l

परन्तु ऐसा नही हुआ …. यहाँ पर उल्लेखनीय है की मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था की पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए, बहुत कम लोगों को ज्ञात है की 1947 के समय में पंजाब की सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी …

यानी की पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ होना तय था … मोहनदास करमचन्द के अनुसार l

नवम्बर 1968 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय हुआ .. हिमाचल प्रदेश और हरियाणा l

पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के बाद भी जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे …

उन्होंने फिर से मांग की … की हमको पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं l

1. पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है क्योंकि श्री लंका के रस्ते से घूम कर जाना पड़ता है l

2. और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं l इसलिए …. कुछ मांगें रखी गयीं 1. इसलिए हमको भारत के बीचो बीच एक Corridor बना कर दिया जाए….

2. जो लाहोर से ढाका तक जाता हो … (NH – 1)

3. जो दिल्ली के पास से जाता हो …

4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो … (10 Miles = 16 KM)

5. इस पूरे Corridor में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे l

30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा बच्चा यह जानता था की यदि मोहनदास करमचन्द 3 फरवरी, 1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को भी …मान लिया जायेगा l

तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो मोहनदास करमचन्द किसी की बात सुनने की स्थिति में था न ही समझने में …और समय भी नहीं था जिसके कारण हुतात्मा नाथूराम गोडसे जी को गांधी वध जैसा अत्यधिक साहसी और शौर्यतापूर्ण निर्णय लेना पडा l

हुतात्मा का अर्थ होता है जिस आत्मा ने अपने प्राणों की आहुति दी हो …. जिसको की वीरगति को प्राप्त होना भी कहा जाता है l

यहाँ यह सार्थक चर्चा का विषय होना चाहिए की हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जीने क्या एक बार भी नहीं सोचा होगा की वो क्या करने जा रहे हैं ?

किसके लिए ये सब कुछ कर रहे हैं ?

उनके इस निर्णय से उनके घर, परिवार, सम्बन्धियों, उनकी जाती और उनसे जुड़े संगठनो पर क्या असर पड़ेगा ?

घर परिवार का तो जो हुआ सो हुआ …. जाने कितने जघन्य प्रकारों से समस्त परिवार और सम्बन्धियों को प्रताड़ित किया गया l

परन्तु ….. अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले मोहनदास करमचन्द के कुछ अहिंसक आतंकवादियों ने 30 जनवरी, 1948 की रात को ही पुणे में 6000 ब्राह्मणों को चुन चुन कर घर से निकाल निकाल कर जिन्दा जलाया l

10000 से ज्यादा ब्राह्मणों के घर और दुकानें जलाए गए l

सोचने का विषय यह है की उस समय संचार माध्यम इतने उच्च कोटि के नहीं थे, विकसित नही थे … फिर कैसे 3 घंटे के अंदर अंदर इतना सुनियोजित तरीके से इतना बड़ा नरसंहार कर दिया गया ….

सवाल उठता है की … क्या उन अहिंसक आतंकवादियों को पहले से यह ज्ञात था की गांधी वध होने वाला है ?

जस्टिस खोसला जिन्होंने गांधी वध से सम्बन्धित केस की पूरी सुनवाई की… 35 तारीखें पडीं l

अदालत ने निरीक्षण करवाया और पाया हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जी की मानसिक दशा को तत्कालीन चिकित्सकों ने एक दम सामान्य घोषित कियाl पंडित जी ने अपना अपराध स्वीकार किया पहली ही सुनवाई में और अगली 34 सुनवाइयों में कुछ नहीं बोले … सबसे आखिरी सुनवाई में पंडित जी ने अपने शब्द कहे “”

गाँधी वध के समय न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर सुनाने की अनुमति मांगी थी और उसे यह अनुमति मिली थी | नाथूराम गोडसे का यह न्यायालयीन वक्तव्य भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था |इस प्रतिबन्ध के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गाँधी वध के सह अभियुक्त गोपाल गोडसे ने ६० वर्षों तक वैधानिक लडाई लड़ी और उसके फलस्वरूप सर्वोच्च न्यायलय ने इस प्रतिबन्ध को हटा लिया तथा उस वक्तव्य के प्रकाशन की अनुमति दे दी। नाथूराम गोडसे ने न्यायलय के समक्ष गाँधी वध के जो १५० कारण बताये थे उनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।

2. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।

3. 6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।

4. मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।

5. 1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।

6. गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।

7. गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।

8. यह गान्धी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।

9. कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (1931) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।

10. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।

11. लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।

12. 14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।

13. मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया।

14. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।

15. पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।

16. 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।

उपरोक्त परिस्थितियों में नथूराम गोडसे नामक एक देशभक्त सच्चे भारतीय युवक ने गान्धी का वध कर दिया।

न्य़यालय में चले अभियोग के परिणामस्वरूप गोडसे को मृत्युदण्ड मिला किन्तु गोडसे ने न्यायालय में अपने कृत्य का जो स्पष्टीकरण दिया उससे प्रभावित होकर उस अभियोग के न्यायधीश श्री जे. डी. खोसला ने अपनी एक पुस्तक में लिखा-

“नथूराम का अभिभाषण दर्शकों के लिए एक आकर्षक दृश्य था। खचाखच भरा न्यायालय इतना भावाकुल हुआ कि लोगों की आहें और सिसकियाँ सुनने में आती थींऔर उनके गीले नेत्र और गिरने वाले आँसू दृष्टिगोचर होते थे। न्यायालय में उपस्थित उन प्रेक्षकों को यदि न्यायदान का कार्य सौंपा जाता तो मुझे तनिक भी संदेह नहीं कि उन्होंने अधिकाधिक सँख्या में यह घोषित किया होता कि नथूराम निर्दोष है।”

तो भी नथूराम ने भारतीय न्यायव्यवस्था के अनुसार एक व्यक्ति की हत्या के अपराध का दण्ड मृत्युदण्ड के रूप में सहज ही स्वीकार किया। परन्तु भारतमाता के विरुद्ध जो अपराध गान्धी ने किए, उनका दण्ड भारतमाता व उसकी सन्तानों को भुगतना पड़ रहा है। यह स्थिति कब बदलेगी?

प्रश्न यह भी उठता है की पंडित नाथूराम गोडसे जी ने तो गाँधी वध किया उन्हें पैशाचिक कानूनों के द्वारा मृत्यु दंड दिया गया परन्तु नाना जी आप्टे ने तो गोली नहीं मारी थी … उन्हें क्यों मृत्युदंड दिया गया ?

नाथूराम गोडसे को सह अभियुक्त नाना आप्टे के साथ १५ नवम्बर १९४९ को पंजाब के अम्बाला की जेल में मृत्यु दंड दे दिया गया। उन्होंने अपने अंतिम शब्दों में कहा था…

यदि अपने देश के प्रति भक्तिभाव रखना कोई पाप है तो मैंने वो पाप किया है और यदि यह पुन्य हिया तो उसके द्वारा अर्जित पुन्य पद पर मैं अपना नम्र अधिकार व्यक्त करता हूँ

– पंडित नाथूराम गोडसे