ancient indian history

Ashwatthama

अश्वत्थामा :
सात चिरंजीवियों में अश्वत्थामा का नाम भी है। द्रोण पुत्र होने के कारण इसे द्रोणि और द्रोणायन भी कहते हैं। यह रूद्र के अंश से उत्पन्न हुआ था। अतः क्रोधी और तेजस्वी था जन्म लेते ही यह अश्व के समान हिनहिनाया जिससे तीनों लोक कंपित हो गए। इसलिए इसका नाम अश्वत्थामा पड़ा। पाण्डव द्रोण के विशेष स्नेह-पात्र थे, इसलिए अश्वत्थामा का भी उनसे अत्यन्त सौहार्द था। तथापि कौरव-पाण्डव युद्ध में उसे कौरवों का साथ देना पड़ा। पिता के छद्म वध से पाण्डव उसके कोप भाजन हो गए।
इसने पाण्डव पक्ष के अंजन पर्व आदि राक्षस, द्रुपद पुत्र सुरथ, शत्रुजंय तथा कुंती भोज के दस पुत्रों का महाभारत युद्ध में वध किया।
द्रोणाचार्य के मृत्यु के पश्चात् कृपाचार्य ने दुर्योधन को आग्रह किया कि अश्वत्थामा को सेनापति नियुक्त कर दें, क्योंकि द्रोण के मुकाबले का वीर केवल वही है। इस पर कर्ण चिढ़ गया और उसने द्रोणाचार्य की वीरता और स्वामिभक्ति पर आक्षेप कर दिए। दुर्योधन ने पक्षपात करके कर्ण को सेनापति नियुक्त कर दिया। कुपित अश्वत्थामा ने प्रतिज्ञा की कि वह तब तक शस्त्र ग्रहण नहीं करेगा, जब तक पाण्डव कर्ण का बंध नहीं कर देते। ताकि दुर्योधन अपने मित्र की वीरता देख ले। कौरवों के संहार के पश्चात् कृपाचार्य, कृतवर्मा व अश्वत्थामा रात्रि के समय एक पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे। अश्वत्थामा पाण्डवों से पिता-वध का बदला लेने के विषय में सोच रहा था। इतने में एक उल्लू ने वृक्ष पर छापा मार कर कई कौए मार डाले। यह देख कर उसने पाण्डवों के शिविर में रात को छापा मारने की चाल सोची कृपाचार्य व कृत वर्मा ने उसे इस दृष्कार्य से मना किया। परन्तु अश्वत्थामा ने एक न सुनी। वह अकेला ही पाण्डव- शिविर में गया और द्रोपदी के सोए पांच पुत्रों, धृष्टद्युमन, शिखण्डी आदि का वध कर दिया। तत्पश्चात् वह कृपाचार्य व कृत को साथ लेकर घायल दुर्योधन के पास गया और उसे बताया कि पांच पाण्डव, कृष्ण व हम तीनों ही बचे हैं। शेष सभी का संहार कर दिया है। यह सुनकर दुर्योधन ने सुख से प्राण त्यागे। पुत्र हत्या से दुखी द्रोपदी ने अश्वत्थामा के सिर की मणि लेने का हठ किया। भीम, अर्जुन आदि उससे युद्ध करने लगे। अश्वत्थामा ने ‘ब्रह्मस्त्र’ छोड़ दिया। कृष्ण के आदेशानुसार भीम आदि पाण्डव साष्टांग लेट गए। इस अस्त्र से पृथ्वी के नष्ट होने की आशंका थी। अतः व्यास आदि मुनियों ने अश्वत्थामा को डांटा और दिव्यमणि पाण्डवों के सुपुर्द करने को कहा। उसने मणि दे दी, परन्तु यह शर्त रखी कि उत्तरा के गर्भस्थ शिशु को समाप्त करने के पश्चात् वह अस्त्र त्यागेगा। परन्तु उसे इस कार्य में सफलता न मिली। श्री कृष्ण ने उत्तरा के गर्भस्थ शिशु की रक्षा की।
English Translation
Ashwatthama:
Ashwatthama’s name is among the seven Chiranjeevis. Being Drona’s son, he is also called Droni and Dronayan. He was born from a part of Rudra. That’s why he was grumpy and bright, as soon as he was born, he neighed like a horse, which shook all the three worlds. That’s why he was named Ashwatthama. The Pandavas were Drona’s special affection, that’s why Ashwatthama also had great cordiality with them. However, he had to side with the Kauravas in the Kaurava-Pandava war. Due to the fake killing of the father, the he was angry with Pandavas.
He killed Adi Rakshasa, Drupada’s son Surath, Shatrujay and ten sons of Kunti Bhoj in the Mahabharata war.
After the death of Dronacharya, Kripacharya urged Duryodhana to appoint Ashwatthama as the commander-in-chief, because he was the only one who could compete with pandavas. Karna got irritated on this and he doubed his bravery and self-devotion. Duryodhana showed favoritism and appointed Karna as the commander-in-chief. Enraged Ashwatthama vows that he will not take up arms until the Pandavas kill Karna. So that Duryodhana could see the bravery of his friend.
After death of many Kauravas, during war, Kripacharya, Kritavarma and Ashwatthama were resting under a tree at night. Ashwatthama was thinking of taking revenge for the murder of his father from the Pandavas. Meanwhile, an owl raided a tree and killed many crows. Seeing this, he thought of a trick to raid the Pandavas’ camp at night. Kripacharya and Krit Verma forbade him from this act. But Ashwatthama did not listen to him. He alone went to the Pandava camp and killed the five sleeping sons of Draupadi, Dhrishtadyumna, Shikhandi etc. After that he took Kripacharya and Krit along with him to the injured Duryodhana and told him that only the five Pandavas, Krishna and the three of us were left. All the rest have been destroyed. Hearing this, Duryodhana happily died. Saddened by the murder of her son, Draupadi went to pandava brothers and insisted on taking the gem of Ashwatthama’s head. Bhima, Arjuna etc. started fighting with Ashwatthama. Ashwatthama used ‘Brahmastra’ in the battle. As per Krishna’s orders, Bhima etc. Pandavas prostrated themselves. The earth was likely to be destroyed by the weapon. Therefore sages like Vyas scolded Ashwatthama and asked him to hand over the divine gem to the Pandavas. He gave the gem, but put a condition that after terminating Uttara’s unborn child, he would give up the weapon. But he did not get success in this work. Shri Krishna protected Uttara’s unborn child.

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