इंसाफ किधर लभिये
“इंसाफ किधर लभिये” इंसाफ किधर लभिये यारो? Copyright (©) Cdr Alok Mohan.सच बोल के, असां हर वार सह लईया।झूठा इल्ज़ाम, सज़ा दिती बिना सबूत,फिर वी इन्ना सब्र दिखा लईया।जख़्मां दी कीमत कोई नहीं जाणे,इक वारी दस, मैं तुहाड़े तों की खट लईया? हर दरवाज़ा खड़का के वेख लईया,पर अंदरों इक वी आवाज़ ना आई।सच बोलण …