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Raja Prsenjit
अयोध्या के प्रमुख राजाराजा प्रसेनजितप्रसेनजित रेणु (प्रथम) अयोध्या के सूर्यवंशी राजा थे। वह राजा कृशाश्व के पुत्र थे । सूर्यवंश भारत का सबसे पुराना क्षत्रिय वंश है जिसे आदित्यवंश, मित्रवंश, अर्कवंश, रविवंश इत्यादी नामो से जाना जाता है । आदि। प्रारंभिक सूर्य वंशी सूर्य को अपना कुल-देवता मानते थे और मुख्य रूप से सूर्य-पूजा करते …
Raja Yuvnasch
अयोध्या के प्रमुख राजाराजा युवनाश्व (प्रथम) युवनाश्व अयोध्या के प्रतापी राजा कुलवाश्व के पुत्र थे। युवनाश्व की मां का नाम सुपर्णा था।इनका विवाह राजा महापद्म की कन्या गौरी से हुआ था। और इनके पुत्र श्रावस्त थे।पौराणिक कथाओं के अनुसार इन्होंने पुरुष होते हुए गर्भ धारण किया था। इन का पुत्र श्रावस्त था । राजा श्रावस्त का कहीं-कहीं …
Raja Chander
अयोध्या के प्रमुख राजा राजा चन्द्र मनु की पुत्री इला का विवाह ऋषि अत्री के पुत्र सोम अथवा चन्द्र के पुत्र बुध से हुआ जिससे पुरुरवा का जन्म हुआ था| यहाँ से चन्द्रवंशी क्षत्रियों का राज्य शुरू होता है | राजा चन्द्र के तीन अन्य नाम इन्दु, आन्ध्र और आर्द्र है। भागवत पुराण में इसे …
Raja Prithu
अयोध्या के प्रमुख राजा राजा पृथु या पृथु रोमन सूर्यवंशी पृथु राजा वेन के पुत्र थे। वेन राजा अंग के पुत्र थे ! राजा अंग वेन से बहुत परेशान थे ! वेन की क्रूरता तथा निर्दयता से दुःखी होकर बन को चले गए। वेन ने राजगद्दी संभाल ली। वह और भी निरंकुश हो गया अत्यंत …
Ayodhia Kings
अयोध्या के प्रमुख राजाअयोध्या के राजाओं की वंशावलियों के विषय में पुराणकार एक मत नही। ऐसा देखने में आया है कि यदि एक राजा के तीन – चार पुत्र हैं। सभी का उल्लेख “राजा” के रूप में किया गया है। अतः अयोध्या (कौशल साम्राज्य) के राजाओं की संख्या में कुछ परिवर्तन स्वाभाविक है। श्रीरामचन्द्र जी …
Adhunik Sahitya
राम कथा पर आधुनिक साहित्य प्रथम स्वतन्त्रता युद्ध (सन 1857) के विद्रोह के पश्चात रानी विक्टोरिया ने भारत का शासन ईस्ट इंडिया कम्पनी से ले लिया था। भारत वासियों को कुछ सुविधाएं भी दी गई। फिर भी समाज की दुर्दशा व संस्कृति-सभ्यता के लोप पर लोग दुखी थे। राम कृष्ण परम हंस (1834-86) और उन के …
Ramavtar
रामावतार रामावतार दशमग्रन्थ साहिब में संग्रहीत 24 अवतारों के अन्तर्गत हैं। इस में 26 अध्याय है। रामावतार का लेखक वाल्मीकि रामायण से अधिक प्रभावित है राम के जन्म से लेकर स्वर्गारोहण तक इस में सम्पूर्ण राम कथा दी गई है। वाल्मीकि रामायण का एक श्लोक ज्यों का त्यों ही रखा गया है। ततो दशरथः प्राप्य …