ancient indian history

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Bhai Choupa Chhibber

भाई चउपत राय या चौपा सिंह छिब्बर  भाई पेरा के सुपुत्र भाई चउपत राय ने छठे गुरु हरि गोविंद जी से लेकर दशम गुरु गोविंद सिंह जी तक गुरु परिवार की सेवा की। वे निरन्तर शिक्षक व अंगरक्षक के रूप में गुरु परिवार के साथ जुड़े रहे। आठवें गुरु हरिकृष्ण जी के साथ दिल्ली जाने …

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Bhai Pera

भाई पेरा छिब्बर भाई पेरा बाबा परागदास के सगे भाई थे। यह गुरु अर्जुन देव के ‘पंच प्यारों’ में एक थे। भाई पेरा छिब्बर हमेशा हिन्दू धर्म में चेतना का प्रचार करते थे । एक समय हिन्दू धर्म पूरे विश्व में प्रचलित था और भारत की सीमाएँ दूर-दूर तक फैली हुई थीं। स्वयं कुछ हिन्दुओं …

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Baba Prag Dass

बाबा पराग दास जी बाबा पराग दास छिब्बर मोहयाल ब्राह्मण थे। वे भृगु गोत्रीय, छिब्बर ब्राह्मण महात्मा गौतम के पुत्र थे। उन्होंने सिक्ख पंथ के प्रचार-प्रसार में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। गुरु नानक देव की कश्मीर यात्रा में ये गुरू के सम्पर्क में आए थे। गुरु नानक देव के स्वर्गवास होने के पश्चात सिक्ख पंथ …

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Bhai Guru Dass

भाई गुरूदास “भाई गुरदास पंजाबी लेखक, इतिहासकार, उपदेशक तथा धार्मिक नेता थे। गुरु ग्रन्थ साहिब का मूल लेखन उन्होने ही किया था। वे चार गुरुओं के साथी भी रहे” भाई केसर सिंह छिब्यर के अनुसार भाई गुरुदास का जन्म स० 1608 वि० है। भाई गुरुदास की जन्म तिथि में विद्वानो में मतभेद है। वे तृतीय …

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Guru Gobind Singh Ji

गुरु गोबिंद सिंह “गुरु गोबिन्द सिंह सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। श्री गुरू तेग बहादुर जी के बलिदान के उपरान्त 11 नवम्बर सन 1675 को 10 वें गुरू बने। आप एक महान योद्धा, चिन्तक, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे” सन 1699 में बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की जो …

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Guru Teg Bahadur Ji

गुरू तेग बहादुर “श्री गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें गुरु थे। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धान्त की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है”गुरू तेग बहादुर का मूल नाम त्याग मल था। चेत, 1688 दि० में अमृतसर स्थान …

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Guru Hari Krishan Ji

गुरू हरि कृष्ण सिक्ख पंथ के आठवे गुरू हरि कृष्ण का जन्म जुलाई सन् 1656 ई० अथवा सावन 1713 वि० को कीरतपुर साहिब में हुआ था । पिता के स्वर्गवास होने के पश्चात उन्हे छोटी आयु में ही गुरू गद्दी संभालनी पड़ी। 5 वर्ष, 2 मास, 13 दिन की आयु में वे गुरु गद्दी पर …

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Guru Hari Rai

गुरू हरि राय गुरू हरिराय छठे गुरू हरि गोविंद जी के पोते और गुरू दित्ता के पुत्र थे। उनका जन्म 13 माघ, सं० 1686 अथवा फरवरी 1629 ई० को हुआ था। उनकी माता का नाम निहाल दई था। गुरू दित्ता धार्मिक प्रवृति के थे, परन्तु उन्होंने सगुण धारा के अन्तर्गत उदासी पंथ का प्रचार आरम्भ …

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Guru Hari Gobind

गुरु हरि गोबिंद “गुरू हरिगोबिन्द सिखों के छठें गुरू थे। साहिब की सिक्ख इतिहास में गुरु अर्जुन देव जी के सुपुत्र गुरु हरगोबिन्द साहिब की दल-भंजन योद्धा कहकर प्रशंसा की गई है। गुरु हरिगोबिन्द साहिब की शिक्षा दीक्षा महान विद्वान् भाई गुरदास की देख-रेख में हुई”छठे गुरु हरिगोबिंद जी आषाढ़, 1666 वि० को गुरु गद्दी …

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Guru Arjun Dev

गुरू अर्जुन देव “गुरु अर्जुन देव सिखों के 5वें गुरु थे। गुरु अर्जुन देव जी शहीदों के सरताज एवं शान्तिपुंज हैं। आध्यात्मिक जगत में गुरु जी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उन्हें ब्रह्मज्ञानी भी कहा जाता है। गुरुग्रन्थ साहिब में तीस रागों में गुरु जी की वाणी संकलित है”गुरु अर्जुन देव का जन्म 18 वैसाख, …

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