ancient indian history

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Maharishi Romaharshan

महर्षि रोम हर्षण या लोम हर्षण रोमहर्षण वेदव्यास के परम प्रिय शिष्य थे। रोमहर्षण के स्तुति पाठ तथा शास्त्रों-पुराणों में उनकी रुचियों को देखकर व्यास जी ने रोमहर्षण को अपना शिष्य बनाया था। इसके पिता क्षत्रिय और माँ ब्राह्मण थीं। रोमहर्षण ने पुराण विद्या का ऐसा अध्ययन किया कि उनकी प्रतिभा चमत्कृत हो गयी। व्यास जी …

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Maharishi Panini

महर्षि पाणिनिमहर्षि पाणिनि, लौकिक संस्कृत भाषा का व्याकरण शास्त्री था इसका काल 500 ई0 पूर्व है। पाणिनि के गुरु का नाम उपवर्ष पिता का नाम पणिन और माता का नाम दाक्षी था। पाणिनि जब बड़े हुए तो उन्होंने व्याकरणशास्त्र का गहरा अध्ययन किया।पणिन नामक ऋषि का पुत्र पिंगल (छन्द शास्त्र का रचयिता) का बड़ा भाई …

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Rishi Yask

ऋषि यास्कयह ऋषि यस्क का पुत्र था। यस्क भृगुकुल में उप्पन्न एक गोत्रकार ऋषि था। वेद के कठिन शब्दों की सूचियाँ अथवा निधन्दु जो प्रजापति कश्यप ने लिखा था। उस पर भाष्य यास्क ने लिखा इसे निरूक्त कहते हैं। वृहदारण्यक उप० में इसे भारद्वाज ऋषि का गुरु कहा है। यास्क का अन्य शिष्य जातुकर्ण्य कहा …

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Rishi Vats

ऋषि वत्स:- भृगु वंशीय गणों में से एक ‘वत्स’ गण है। अन्य विद, यस्क, वैन्य, शौनक, मित्रेयु आष्टिषेण वत्स ऋषि व्यास की शिष्य परम्परा में याज्ञवल्क्य का वाजसनेय शिष्य था। पूर्वी भारत में वत्सनाम का एक लोक समूह था, जिसने महाभारत युद्ध में पाण्डवों का पक्ष लिया था। काशी देश का एक राजा भी वत्स …

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Rishi Maitreya

ऋषि मित्रायु – मैत्रेय मित्रायु भार्गव ऋषि थे। इनकी कन्या का नाम मैत्रेयी था। हरिवंश पुराण के अनुसार यह शाखा प्रवर्तक आचार्य था, जिससे मैत्रेय ब्राह्मण और मैत्रायणी शाखा उत्पन्न हुई। मैत्रेय पांचाल देशका ब्रह्मक्षत्रिय राजा था। अपने दादा दिवोदास तथा पिता मित्रायु की तरह यह भृगुवंशियों में शामिल हो गया था। इसलिए इसे मैत्रेय भार्गव …

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Sage Shounak

Sage Shounak ऋषि शौनक ऋषि शौनक भृगुकुल का मंत्रदृष्टा हुआ है। यह व्यास की अथर्वन शिष्य परम्परा में से पथ्य नामक आचार्य का शिष्य था। एक भार्गव ऋषि इन्द्रौत हुआ है। भृगु से भार्गव, च्यवन, और्व, आप्नुवान, जमदग्नि, दधीचि आदि के नाम से गोत्र चले। यदि हम ब्रह्मा के मानस पुत्र भृगु की बात करें …

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Sage Vaishampayan

ऋषि वैशंपायनवैशंपायन भृगु कुल का गोत्रकार ऋषि है। वह कृष्ण द्वैपायन व्यास के चार वेद प्रवर्तक शिष्यों में एक था। अन्य पैल, जैमिनी और सुमन्तु थे। इन चारों को व्यास ने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का ज्ञान प्रदान किया। वैशंपायन कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तरीय संहिता का निर्माता था। पाणिनि की अष्टाध्यायी और पंतजलि के महाभाष्य …

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Rishi Markandeya

ऋषि मार्कण्डेय ये ऋषि भृगु वंश में उत्पन्न महाकवि मर्क या मृकंड के पुत्र थे। मर्क उपनस शुक्र का पुत्र था। शुक्र के सारे वंशज दानव या अनार्य लोगों के साथ सम्बन्ध करने के लिए नष्ट हुए। केवल मर्क के पुत्र मार्कण्डेय भृगु कुल के प्रसिद्ध गोत्रकार बनें। मार्कण्डेय दीर्घ जीवी और अमर थे ये …

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Rishi Kutsa

ऋषि कुत्स :ऋषि कुत्स रूरू नामक राजऋषि के पुत्र तथा भृगु कुल के गोत्रकार ऋषि थे। अपने शत्रुओं के दमन के लिए उन्हें इन्द्र से सहायता मांगनी पड़ी। इन्द्र ने उनके शत्रुओं का वध कर दिया। श्री राम चन्द्र की राज सभा में भी एक कुत्स ऋषि थे। कुत्स ऋषि का उल्लेख ऋग्वेद में, विभिन्न …

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Maharishi Valmiki

भृगु वंशीय महाकवि बाल्मीकि : भगवान् परशुराम और कवि बाल्मीकि दोनों भृगुवंश के उज्जवल रत्न हैं। प्रथम महान् योद्धा थे, उन्होंने दुष्ट शत्रुओं का नाश किया और द्वितीय ने अपनी लेखनी द्वारा क्षत्रिय राजा राम एवं उसके परिवारको अमर कर दिया। महाभारत और पुराणों में बाल्मीकि को भार्गव कहा गया है। महाभारत के अन्तर्गत ‘रामोपाख्यान’ …

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