ancient indian history

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Lord Parshuram

जमदग्नि और परशुराम :जमदग्नि ऋषि ऋचीक के पुत्र थे अतः उन्हें आर्चिक भी कहते हैं। वे वैवस्वत मन्वतर के सप्तर्षियों में एक हैं। कश्यप ऋषि ने उन्हें षडाक्षर का उपदेश दिया। वे अक्षर ब्रह्म का उपदेश करते थे। ऋग्वेद में इनके कई सूक्त हैं। इनका विवाह इक्ष्वाकु राजा रेणु, प्रसेनजित की पुत्री कामली रेणुका से …

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Rishi Richik

  ऋचीक :विष्णु धर्म में और्व और ऋचीक को एक ही माना है। अनेक स्थानों पर इसे भृगुनंदन, भार्गव एवं भृगु कहा है।  आप्तवान् का पुत्र उरु और उरु का पुत्र ऋचीक और्व था। ये ऋषि राजा कृतवीर्य हैहय के राज पुरोहित थे कृतवीर्य इन्हें बहुत सी सम्पति दी थी कृतवीर्य के पश्चात उसका पुत्र …

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Chayavan Rishi

च्यवन भार्गव :च्यवन ऋषि अयोध्या के राजा इक्ष्वाकु के समकालीन थे। ऋग्वेद में इनका उल्लेख च्यवन नाम से एक वृद्ध ऋषि के रूप में हुआ है। अन्य वैदिक ग्रन्थों में च्यवन नाम ही है। वे बहुत कुरूप थे। इनके पिता भृगु और माँ पुलोमा थी। पुलोमा का पुलोम दैत्य ने हरण कर लिया। भय के …

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Rishi Sarswat

ऋषि सारस्वत : सारस्वत ऋषि दधीचि भार्गव के पुत्र थे। वे वेद आचार्य थे। इनकी माँ का नाम सरस्वती था। दधीचि ऋषि के आत्म-समर्पण के पश्चात् बारह वर्ष अकाल पड़ा। सरस्वती नदी के तट पर रहने वाले समस्त लोग व ऋषि अन्न की खोज में निकल, इधर-उधर भटकने लगे। केवल सारस्वत ही सरस्वती नदीके किनारे …

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Bhrigu Clan

भृगु कुल :व्युत्पत्ति की दृष्टि से भृगु शब्द का अर्थ प्रकाशमान अग्नि के विद्युत रूप का यह प्रतिनिधित्व करता है। भृगु प्रजापति:ब्राह्मण्ड पुराण के अनुसार इनकी पत्नी ख्याति थी, जो दक्ष प्रजापति की पुत्री थी। देव-दैत्य युद्ध में यह दैत्यों की पक्षपाती थी। भृगु तपस्या के लिए वन में चला गये और इनकी पत्नी देवों …

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Maharishi Vyas

Maharishi Vyas. महर्षि व्यास :व्यास महर्षि पराशर के पुत्र थे। उनकी माता का नाम सत्यवती या काली था। वह कैवर्त राज की पुत्री थी। व्यास का नाम कृष्ण था, क्योंकि उसका जन्म यमुना नदी के एक द्वीप में हुआ था, उन्हें द्वैपायन भी कहते थे। उनकी जन्मतिथि वैशाख–पूर्णिमा मानी जाती है। वे कौरवों- पाण्डवों के …

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Sage Parashara

पराशर :पुत्रों की मृत्यु व वंश के क्षय से व्यथित मैत्रावरूण वसिष्ठ घर से निकल पड़े। इनकी पुत्र वधु शक्ति की विधवा पत्नी अदृश्यवन्ती रोती हुई उनके पीछे चल पड़ी। उसके गर्भ से वेद ध्वनि सुन वसिष्ठ आनन्दित हुए कि उनका वंश जीवित है। सात पुत्रों की मृत्यु से दुखी बूढ़े वसिष्ठ को इस बच्चे …

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Vasishtha Lineage Continued

जातुकर्ण:वसिष्ठ वंश में जातुकर्ण ऋषि हुआ है। इसने व्यास को वेद-पुराण की शिक्षाप्रदान की थी। इसे अठाईस द्वापरों में से एक युग का व्यास कहा गया है। इस ऋषि के वंशज जातुकर्ण्य कहलाते हैं। आश्रम : – मनाली (हिमाचल) से तीन किलोमीटर दूर विपाशा (व्यास) नदी के किनारे वसिष्ठ शिला नामक आश्रम है। ऋषि मैत्रावरुणि …

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Vasishtha Lineage Continued

वसिष्ठ हिरण्य नाभ कौशल्य  यह वसिष्ठ ब्रह्मा के मानस पुत्र वसिष्ठ से भिन्न है। राम की बीसवीं पीढ़ी में राजा हिरण्यनाभ कौशल्य हुआ है। | वसिष्ठ उसका पुत्र था। यह जैमिनी नामक आचार्य का शिष्य था। जैमिनी ने इसे वेद की पाँच सौ संहिताएँ सिखाई थीं। इसने वही अपने शिष्य याज्ञवल्क्य को प्रदान की। यह …

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Vasishtha Lineage Continued

सुयज्ञ वसिष्ठराजा दशरथ तथा श्रीरामचन्द्र का पुरोहित सुयज्ञ वसिष्ठ था। यह नीति विशारद, प्रमुख ज्ञानी, क्षमाशील एवं सहिष्णु था । तपस्या के बल से इसने ‘ब्रह्मर्षिपद प्राप्त किया था। दशरथ के द्वारा किए कामेष्टि यज्ञ में वह प्रमुख ऋत्विज था । राम आदि भाइयों को शस्त्र शास्त्र विद्या भी इसी ने सिखाई। राम को उपदेश …

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