ancient indian history

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Rishi Kaushik

ऋषि कुशिक :कुशिक वंश के गोत्रकार कौशिक ऋषि निम्न हैं- उंदुबर, कारूपक (कारिषी) गालव, चांद्रव, जाबाल, तारक, तारकायन, तालकायन, देवरात, दैवल, ध्यानज्ञाव्य, पणिन, पार्थिन, बभ्रु, बादर, वाष्कल, मधुच्छंदस, याज्ञवल्क्य, लोहित्य, लोहिण्य, शालकायन, श्यामायन, समर्षण, सांकृत्य, सैंधवायन, सौश्रुत, हिरण्याक्ष हैं कौशिक एक प्राचीन सनातन धर्म वंश है। ऋषि विश्वामित्र, इसी वंश के थे। राजा कौशिक, गाधि …

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Rishi Yajnavalkya

ऋषि याज्ञवल्क्यऋषि याज्ञवल्क्य युग प्रर्वतक आचार्य थे। वे अपने युग के सर्वश्रेष्ठ उपनिषद्कार माने जाते हैं। इनका उल्लेख शतपथ ब्राह्मण और वृहदरण्यक उपनिषद् में अनेक बार हुआ हैं। यज्ञवल्क्य के वंशज होने के कारण वे याज्ञवल्क्य कहलाए। याज्ञवल्क्य बृहदारण्यक उपनिषद में वर्णित एक प्राचीन ऋषि हैं। याज्ञवल्क्य ने हमारे अस्तित्व, चेतना और नश्वरता की प्रकृति …

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Rishi Vishvamitra

विश्वामित्र ऋषि विश्वा मित्र कान्य कुब्ज के राजा गाधि के पुत्र तथा कुशिक के पौत्र थे। विश्वामित्र वैदिक काल के बड़े ही प्रतापी और तेजस्वी महापुरुष थे। ऋषि धर्म ग्रहण करने के पूर्व वे बड़े पराक्रमी और प्रजावत्सल नरेश थे ।वह एक बार ऋषि वसिष्ठ के आश्रम में गये। आश्रमवासियों ने उसका राजसी सत्कार किया विश्वामित्र …

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Rishi Bhargava

राजर्षि गाधि और भार्गवसनातन धर्म में कोई जाति व्यवस्था नहीं थी, जैसा कि वेदों और पुराणों जैसे प्राचीन साहित्य से स्पष्ट है। सभी अपने को आर्य मानते थे। सनातन धर्म उन दिनों तीन वर्गों में विभाजित था। जिन्होंने हवन, विवाह आदि धार्मिक अनुष्ठान किए। ब्राह्मण कहलाते थे। संस्कृत मन्त्रों के रचयिता ऋषि की संज्ञा प्राप्त …

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Rishi Vararuchi

ऋषि वररुचि कात्यायन:वररुचि दक्षिण भारत के एक ब्राह्मण थे। हालाँकि यह संभव है कि याज्ञवल्क्य, उनके पुत्र कात्यायन, गुजरात में बस गए थे, वररुचि के पिता, महाराष्ट्र की ओर गए होंगे और वहाँ वररुचि का जन्म हुआ था। याज्ञवल्क्य का आश्रम, स्कंदपुरम, गुजरात में स्थित है। वररुचि वासवदत्त के लेखक सुबंधु के मामा थे, जो …

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Rishi Katyayan

ऋषि कात्यायन कात्यायन नाम के कई ऋषि हुए है एक कात्यायन नाम के ऋषि विश्वामिंत्र के वंश में जिन्होंने श्रोत, गृह्य और प्रतिहार सूत्रों की रचना की थी !दूसरे गोमिलपुत्र थे जिन्होंने ‘छंदोपरिशिष्टकर्मप्रदीप’ की रचना की थी और तीसरे कात्यायन वररुचि सोमदत्त के पुत्र थे जो पाणिनीय सूत्रों के प्रसिद्ध वार्तिककार थेआंगिरस, काश्यप, कौशिक, भार्गव को  भी  कात्यायन ऋषि माना  जाता  है …

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Rishi Vatsyayan

ऋषि वात्स्यायन भृगुवंशीय वातस्य ऋषि का वंशज होने के कारण इस ऋषि का नाम वात्स्यायन पड़ा। सुबंधु के अनुसार इस ऋषि का मूल नाम मल्ल नाग था। वात्स्यायन इसका गोत्र नाम है। इस ऋषि ने “कामसूत्र” ग्रन्थ की रचना की। इसका समय 300 ई०  था। ऋषि वात्स्यायन स्वयं योगी और ब्रह्मचारी था। कई विद्वान इसे जयपुर …

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Rishi Ugrashravas

ऋषि उग्रश्रवस व्यास की पुराण और महाभारत परम्परा का प्रमुख आचार्य था। इसलिए पौराणिक साहित्य में इसे जगद् गुरु तथा महामुनि उपाधियों से विभूषित किया गया है। वह भागवत पुराण, हरिवंश और पद्म पुराण सहित कई पुराणों के कथाकार भी थे ! वह रोमहर्षन के पुत्र थे, और महाभारत के लेखक व्यास के शिष्य थे। …

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Maharishi Romaharshan

महर्षि रोम हर्षण या लोम हर्षण रोमहर्षण वेदव्यास के परम प्रिय शिष्य थे। रोमहर्षण के स्तुति पाठ तथा शास्त्रों-पुराणों में उनकी रुचियों को देखकर व्यास जी ने रोमहर्षण को अपना शिष्य बनाया था। इसके पिता क्षत्रिय और माँ ब्राह्मण थीं। रोमहर्षण ने पुराण विद्या का ऐसा अध्ययन किया कि उनकी प्रतिभा चमत्कृत हो गयी। व्यास जी …

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Maharishi Panini

महर्षि पाणिनिमहर्षि पाणिनि, लौकिक संस्कृत भाषा का व्याकरण शास्त्री था इसका काल 500 ई0 पूर्व है। पाणिनि के गुरु का नाम उपवर्ष पिता का नाम पणिन और माता का नाम दाक्षी था। पाणिनि जब बड़े हुए तो उन्होंने व्याकरणशास्त्र का गहरा अध्ययन किया।पणिन नामक ऋषि का पुत्र पिंगल (छन्द शास्त्र का रचयिता) का बड़ा भाई …

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