ancient indian history

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Agni Vaishya

ऋषि अग्नि वैश्य अग्नि वेश्य को अंगिरा गोत्र का और भारद्वाज का छोटा भाई माना जाता है। इनके गुरू अगस्त ऋषि थे। ब्रह्मा, विष्णु, महेश और ऋषि हम भारतीयों के पूर्वज हैँ। अग्नि वैश्य, सूर्य ओर वायु (वायो), ऋषि थे । ऋग्वेद में अग्नि के ऋषि होने के प्रमाण है ।द्रुपद और द्रोणाचार्य ने अग्नि …

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Patanjali

महर्षि पतंजलि :पुराणकारों के अनुसार पंतजलि शेष के अवतार थे। वे बालपन से ही प्रखर बुद्धि के स्वामी थे। सम्भवतः वे काश्मीर निवासी थे। डॉ० रा० गो० भण्डारकर, डॉ० वासुदेव शरण अग्रवाल, डॉ० प्रभातचन्द्र चक्रवर्ती आदि विद्वानों के अनुसार उनका समय ईसा से 150 वर्ष पूर्व है। पतंजलि के ग्रंथों में लिखे उल्लेख से उनके …

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Ashwatthama

अश्वत्थामा :सात चिरंजीवियों में अश्वत्थामा का नाम भी है। द्रोण पुत्र होने के कारण इसे द्रोणि और द्रोणायन भी कहते हैं। यह रूद्र के अंश से उत्पन्न हुआ था। अतः क्रोधी और तेजस्वी था जन्म लेते ही यह अश्व के समान हिनहिनाया जिससे तीनों लोक कंपित हो गए। इसलिए इसका नाम अश्वत्थामा पड़ा। पाण्डव द्रोण …

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Rishi Dronacharya

द्रोणाचार्य : द्रोणाचार्य भारद्वाज के पुत्र थे ये भारद्वाज इक्ष्वाकु वंश की 91वीं पीढ़ी के राजा सुसंधि के समकालीन थे। द्रोण की पत्नी कृपी कृपाचार्य की बहिन थी। इन दोनों का पालन पोषण राजा शान्तनु ने किया था। गौतम की पुत्री होने के कारण कृपी को गौतमी भी कहते थें।  द्रोणाचार्य ने अपने पिता से …

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Rishi Kanva

ऋषि कण्वकण्व वैदिक काल के ऋषि थे। इनके पिता का नाम घोर ऋषी था । कण्व एक से अधिक हुए हैं, एक अंगिरस तथा दूसरा काश्यप। कण्व का अर्थ सुखमय होता है। 1. कण्व अंगिरस इसका कुल पुरुओं से उत्पन्न हुआ है। विष्णु पुराण में इसे मतिनार का पोता और अप्रतिरथ का पुत्र कहा है। कई …

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Rishi Tapodat

ऋषि  तपोदत (यवक्रीत)गंगा नदी के तट पर रैभ्य नामक एक महामुनि निवास करते थे। उनके आश्रम के नजदीक ही महर्षि भारद्वाज का आश्रम था। दोनों में घनिष्ठ दोस्ती थी। परस्पर एक-दूसरे के सुख-दुख का विचार रखते थें। रैभ्य मुनि के दो पुत्र थे-अर्वावसु और परावसु। दोनों भाई बुद्धिमान और समस्त विद्याओं में पारंगत थें। एक …

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Rishi Vamdev

ऋषि वामदेव :एक प्रसिद्ध वैदिक सूक्त द्रष्टा हुए है। इन्हें ऋग्वेद के चौथे मण्डल का रचयिता माना जाता है। पूर्व जन्म के सम्बंध में विचार करने वालों तत्वज्ञों में वामदेव को सर्वश्रेष्ठ ऋषि माना जाता है। इनसे सम्बंधित तत्वज्ञान ‘जन्मत्रयी’ नाम से प्रसिद्ध है। रामायण काल के प्रसिद्ध ऋषि भारद्वाज हुए हैं। इनका आश्रम प्रयाग …

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Rishi Bhardwaj

ऋषि भरद्वाज :ऋषि भरद्वाज त्रेता युग के आरम्भ में हुए यह इक्ष्वाकु वंश की 43वीं पीढ़ी में हुए राजा अंशुमान के समकालीन थे। ये कुल ब्रह्मा के मानस पुत्र अंगिरा ऋषि के वंशज थे। इनके कई महान् विभूतियाँ हुई हैं, जिनमें प्रमुख वितथ भारद्वाज, कण्व, वामदेव, यवक्रीत, द्रोणाचार्य अश्वत्थामा और पंतजलि हैं। ऋषि भरद्वाज वृहस्पति …

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Rishi Angiras

महर्षि अंगिरसमहर्षि अंगिरस मन्त्रद्रष्टा, योगी, संत तथा महान भक्त हैं। इनकी ‘अंगिरा-स्मृति’ में सुन्दर उपदेश तथा धर्माचरण की शिक्षा व्याप्त है।महर्षि अंगिरस ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं तथा  यह   सप्तर्षियों में एक है।  प्रजापति भी कहा गया है ।इनके दिव्य अध्यात्मज्ञान, योगबल, तप-साधना एवं मन्त्रशक्ति की विशेष प्रतिष्ठा है । इनकी पत्नी दक्ष प्रजापति की पुत्री स्मृति थीं ।अंगिरस …

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Rishi Gobhil

ऋषि गोभिल :गोभिल कश्यप कुल का गोत्रकार ऋषि है। इस ऋषि द्वारा रचित “गोभिल गृह्य सूत्र” “गोभिल” गृह्य कारिका, ” “गोभिल परिशिष्ट” आदि ग्रन्थ है। गन्धर्व चित्रेश्वर द्वारा स्थापित महाभारत पांडव-कौरव के पूर्वज के चित्रेश्वर शिवलिंग हैं। जैमिनीश चित्रेश्वर के पश्चिम में महर्षि जैमिनि द्वारा स्थापित। उसके आगे सामन्त, राजा आदि तथा और ऋषियों द्वारा …

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