ancient indian history

Uncategorized

Rishi Shamik

ऋषि शमीकशमीक ऋषि अंगिरा कुल में उत्पन्न हुए थे। उन की पत्नी का नाम गौ और पुत्र श्रृंगी था। शमीक ऋषि महान तपस्वी तथा परोपकारी स्वभाव के थे । कौशिक नदी के तटपर एक अतीव सुन्दर एवं प्राकृतिक स्थान पर ऋषि शमीक का आश्रम था ।अनेक ऋषिकुमार उनके पास वेदों का अध्ययन करने के लिए रहते थे …

Rishi Shamik Read More »

Rishi Shaktayana

ऋषि शाकटायन शाकटायन वैदिक काल के ८वीं ईसापूर्व के , संस्कृत व्याकरण के रचयिता थे। यह ऋषि काण्व वंशीय थे। यह व्याकरण आचार्य पाणिनी और यास्क से पूर्व हुए हैं। गार्ग्य के अतिरिक्त सभी नैरूक्त आचार्य शाकटायन को अपना आदि आचार्य मानते हैं। इनका “उणादि सूत्र” पाठ प्रसिद्ध ग्रन्थ है। यास्क, पाणिनि एवं अन्य संस्कृत वैयाकरणों ने उनके विचारों का सन्दर्भ दिया है। …

Rishi Shaktayana Read More »

Agni Vaishya

ऋषि अग्नि वैश्य अग्नि वेश्य को अंगिरा गोत्र का और भारद्वाज का छोटा भाई माना जाता है। इनके गुरू अगस्त ऋषि थे। ब्रह्मा, विष्णु, महेश और ऋषि हम भारतीयों के पूर्वज हैँ। अग्नि वैश्य, सूर्य ओर वायु (वायो), ऋषि थे । ऋग्वेद में अग्नि के ऋषि होने के प्रमाण है ।द्रुपद और द्रोणाचार्य ने अग्नि …

Agni Vaishya Read More »

Patanjali

महर्षि पतंजलि :पुराणकारों के अनुसार पंतजलि शेष के अवतार थे। वे बालपन से ही प्रखर बुद्धि के स्वामी थे। सम्भवतः वे काश्मीर निवासी थे। डॉ० रा० गो० भण्डारकर, डॉ० वासुदेव शरण अग्रवाल, डॉ० प्रभातचन्द्र चक्रवर्ती आदि विद्वानों के अनुसार उनका समय ईसा से 150 वर्ष पूर्व है। पतंजलि के ग्रंथों में लिखे उल्लेख से उनके …

Patanjali Read More »

Ashwatthama

अश्वत्थामा :सात चिरंजीवियों में अश्वत्थामा का नाम भी है। द्रोण पुत्र होने के कारण इसे द्रोणि और द्रोणायन भी कहते हैं। यह रूद्र के अंश से उत्पन्न हुआ था। अतः क्रोधी और तेजस्वी था जन्म लेते ही यह अश्व के समान हिनहिनाया जिससे तीनों लोक कंपित हो गए। इसलिए इसका नाम अश्वत्थामा पड़ा। पाण्डव द्रोण …

Ashwatthama Read More »

Rishi Dronacharya

द्रोणाचार्य : द्रोणाचार्य भारद्वाज के पुत्र थे ये भारद्वाज इक्ष्वाकु वंश की 91वीं पीढ़ी के राजा सुसंधि के समकालीन थे। द्रोण की पत्नी कृपी कृपाचार्य की बहिन थी। इन दोनों का पालन पोषण राजा शान्तनु ने किया था। गौतम की पुत्री होने के कारण कृपी को गौतमी भी कहते थें।  द्रोणाचार्य ने अपने पिता से …

Rishi Dronacharya Read More »

Rishi Kanva

ऋषि कण्वकण्व वैदिक काल के ऋषि थे। इनके पिता का नाम घोर ऋषी था । कण्व एक से अधिक हुए हैं, एक अंगिरस तथा दूसरा काश्यप। कण्व का अर्थ सुखमय होता है। 1. कण्व अंगिरस इसका कुल पुरुओं से उत्पन्न हुआ है। विष्णु पुराण में इसे मतिनार का पोता और अप्रतिरथ का पुत्र कहा है। कई …

Rishi Kanva Read More »

Rishi Tapodat

ऋषि  तपोदत (यवक्रीत)गंगा नदी के तट पर रैभ्य नामक एक महामुनि निवास करते थे। उनके आश्रम के नजदीक ही महर्षि भारद्वाज का आश्रम था। दोनों में घनिष्ठ दोस्ती थी। परस्पर एक-दूसरे के सुख-दुख का विचार रखते थें। रैभ्य मुनि के दो पुत्र थे-अर्वावसु और परावसु। दोनों भाई बुद्धिमान और समस्त विद्याओं में पारंगत थें। एक …

Rishi Tapodat Read More »

Rishi Vamdev

ऋषि वामदेव :एक प्रसिद्ध वैदिक सूक्त द्रष्टा हुए है। इन्हें ऋग्वेद के चौथे मण्डल का रचयिता माना जाता है। पूर्व जन्म के सम्बंध में विचार करने वालों तत्वज्ञों में वामदेव को सर्वश्रेष्ठ ऋषि माना जाता है। इनसे सम्बंधित तत्वज्ञान ‘जन्मत्रयी’ नाम से प्रसिद्ध है। रामायण काल के प्रसिद्ध ऋषि भारद्वाज हुए हैं। इनका आश्रम प्रयाग …

Rishi Vamdev Read More »

Rishi Bhardwaj

ऋषि भरद्वाज :ऋषि भरद्वाज त्रेता युग के आरम्भ में हुए यह इक्ष्वाकु वंश की 43वीं पीढ़ी में हुए राजा अंशुमान के समकालीन थे। ये कुल ब्रह्मा के मानस पुत्र अंगिरा ऋषि के वंशज थे। इनके कई महान् विभूतियाँ हुई हैं, जिनमें प्रमुख वितथ भारद्वाज, कण्व, वामदेव, यवक्रीत, द्रोणाचार्य अश्वत्थामा और पंतजलि हैं। ऋषि भरद्वाज वृहस्पति …

Rishi Bhardwaj Read More »

Scroll to Top